
नई दिल्ली। कांग्रेस ने शनिवार को अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए छह राज्यों के लिए नए प्रभारी महासचिवों की नियुक्ति की है। इन नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा पंजाब की है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने राजस्थान के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को पंजाब में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सचिन पायलट की नियुक्ति पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी प्रतिक्रिया दी है। चन्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पायलट का स्वागत करते हुए कांग्रेस हाईकमान के फैसले के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी महासचिव नियुक्त किए जाने पर उनका हार्दिक स्वागत है। चन्नी की इस प्रतिक्रिया को पार्टी के भीतर पायलट के लिए सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, संगठन में किए गए बदलाव के तहत छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल को अब असम का प्रभारी महासचिव बनाया गया है। बघेल इससे पहले पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं, सचिन पायलट अब पंजाब का प्रभार संभालेंगे। पायलट इससे पहले छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
इसके अलावा वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने मुकुल वासनिक की जगह ली है। मुकुल वासनिक कांग्रेस महासचिव बने रहेंगे, लेकिन फिलहाल उन्हें किसी राज्य का प्रभारी नहीं बनाया गया है। सुरजेवाला गुजरात के साथ-साथ कर्नाटक के प्रभारी महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।
पार्टी ने अन्य राज्यों में भी बदलाव किए हैं। सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. श्रीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। कांग्रेस के मुताबिक, इन नियुक्तियों का उद्देश्य राज्यों में संगठन को और मजबूत करना तथा आगामी चुनावों के मद्देनजर पार्टी की तैयारियों को गति देना है।
पंजाब में सचिन पायलट के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। राज्य में कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी गुटबाजी, नेतृत्व को लेकर खींचतान और संगठनात्मक स्तर पर तालमेल की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के साथ सीधी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में पायलट की जिम्मेदारी केवल संगठन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें अलग-अलग गुटों और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करना होगा।
कांग्रेस ने अपने पद से कार्यमुक्त किए गए महासचिवों एवं प्रभारियों जितेंद्र सिंह, रमेश चेन्निथला और मणिकम टैगोर के योगदान की भी सराहना की है। चेन्निथला अब केरल के गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि मणिकम टैगोर तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का दायित्व निभा रहे हैं।
कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर पंजाब में सचिन पायलट की नियुक्ति पर अब सबकी नजर रहेगी कि वह पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को कितना कम कर पाते हैं और संगठन को चुनावी मोर्चे पर कितनी मजबूती दे पाते हैं।






