
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए अपने राजनीतिक आलोचकों पर तीखा निशाना साधा। करीब 48 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक प्रगति, युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों और भारत की वैश्विक भूमिका का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने लाल किले से 15 अगस्त को दिए गए अपने भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने लाल किले से 15 अगस्त को कुछ लोगों के लिए ‘होम्योपैथी की गोली’ दी थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था और इसके बाद कई लोग बौखलाने लगे। प्रधानमंत्री ने होम्योपैथी का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पद्धति में कभी-कभी इलाज के दौरान बीमारी कुछ समय के लिए उभरती हुई दिखाई देती है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि जैसे ही उन्होंने यह ‘गोली’ दी, वैसे ही ‘दिमागी नक्सल’ बाहर आने लगे।
पीएम मोदी ने कहा कि हालांकि जनता इन लोगों का असली रंग देख रही है। उनके इस बयान को विपक्ष और सरकार के आलोचकों पर सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा गया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान वर्ष 2013 में SRCC में दिए गए अपने संबोधन को भी याद किया। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और मेट्रो से कॉलेज के कार्यक्रम में पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि बीते दशक में भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, जब नए बाजार खुलते हैं तो भारत के युवाओं के लिए रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होते हैं।
मोदी ने कहा कि वर्ष 2013 की तुलना में आज देश आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि देश में तेजी से हो रहे बदलाव और विकास के कारण युवाओं के सामने संभावनाओं के नए रास्ते खुले हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्हें बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप खुद को तैयार करने की सलाह दी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नई पीढ़ी और खासतौर पर Gen-Z का भी जिक्र किया। उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनकी भाषा में बात करें तो SRCC के पूर्व छात्र ‘OG’ हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग भले ही धुरंधर न हों, लेकिन दुनियाभर में अपनी पहचान और प्रभाव जरूर बनाया है।
SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का भाषण शिक्षा, अर्थव्यवस्था और युवाओं के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी केंद्रित रहा। अपने पुराने संबोधन को याद करते हुए मोदी ने कहा कि एक दशक में भारत की तस्वीर काफी बदली है। समारोह में उन्होंने युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उनकी भूमिका को अहम बताया।







