
मथुरा/वृंदावन। देशभर में शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। रात 12 बजते ही मथुरा-वृंदावन से लेकर द्वारका और जगन्नाथ पुरी तक मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव शुरू हो गया। घंटियों और शंखनाद के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए और जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और मंगला आरती का आयोजन किया गया।
भगवान श्रीकृष्ण का इस वर्ष 5253वां जन्मोत्सव मनाया गया। जन्माष्टमी को लेकर देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में कई दिन पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। यहां जन्मोत्सव को देखने और भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
मथुरा में शुक्रवार शाम 6 बजे तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन को इस बार देश-विदेश से करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए।
द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष आयोजन हुआ। आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दिल्ली के इस्कॉन मंदिर और जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में भी मंगला आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
काशी में भी जन्माष्टमी को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला। यहां इस्कॉन मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई। भक्त घंटों इंतजार के बावजूद भगवान के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
राजस्थान के नाथद्वारा में जन्माष्टमी का उत्सव अलग अंदाज में मनाया गया






