
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन के साथ देश के महत्वपूर्ण व्यापारिक और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल-चीन के बीच कारोबार के लिए अहम रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर मार्ग बाढ़ की चपेट में आने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सीमा चौकी, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे का बड़ा हिस्सा बाढ़ में तबाह हो गया है।
रासुवागढ़ी-केरुंग मार्ग नेपाल के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। चीन से नेपाल आने वाला बड़ी मात्रा में सामान इसी रास्ते से होकर पहुंचता है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने और आवाजाही बंद होने से दोनों देशों के बीच माल परिवहन प्रभावित हुआ है। इससे कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए मंत्रालय ने अभियान तेज कर दिया है। साथ ही, जहां तत्काल बिजली बहाली संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक ऊर्जा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
मंत्रालय के मुताबिक नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। रसुवा जिले में भी बिजली बहाली का काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए।
बिजली और रोशनी की समस्या से निपटने के लिए मंत्रालय ने 2 किलोवाट क्षमता वाले संस्थागत सोलर सिस्टम और 20 वाट क्षमता वाले 500 सोलर सेट की व्यवस्था शुरू की थी। इन सोलर सेटों को दूसरे ही दिन वन-डोर सिस्टम के जरिए प्रभावित इलाकों में भेज दिया गया।
प्रशासन के सामने फिलहाल सड़क, पुल, बिजली और व्यापारिक ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। एक ओर राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं, वहीं दूसरी ओर बाढ़ से प्रभावित महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों और आवश्यक सेवाओं को जल्द बहाल करने पर जोर दिया जा रहा है। नेपाल-चीन व्यापार मार्ग की बहाली को भी आर्थिक गतिविधियों को सामान्य करने के लिए अहम माना जा रहा है।





