Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

लोकसभा में पेपर लीक विधेयक पास, राहुल गांधी के भाषण पर संग्राम; सत्ता-पक्ष ने लगाए झूठे आरोपों के आरोप

राहुल गांधी
राहुल गांधी
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। लोकसभा ने बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल माफिया पर सख्ती के उद्देश्य से लाया गया है। इससे पहले मंगलवार को इस विधेयक पर करीब नौ घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। दूसरी ओर राज्यसभा ने ‘वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध’ बनाने वाला विधेयक भी पारित कर दिया।

हालांकि लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का केंद्र केवल पेपर लीक नहीं रहा, बल्कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का लगभग 50 मिनट का भाषण और उसमें लगाए गए आरोप पूरे दिन की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गए। राहुल गांधी ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने, शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव में चलाने और छात्रों के आंदोलनों को दबाने का आरोप लगाया। उनके भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष ने विरोध दर्ज कराया और सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

Advertisement Box

राहुल के बयान पर सत्ता पक्ष का विरोध

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि उन्होंने कई छात्रों से बातचीत की, जिनमें 18 वर्षीय छात्रा लवली का भी जिक्र किया। इसी संदर्भ में उन्होंने “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इन शब्दों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तीखा विरोध जताया और इसे असंसदीय भाषा बताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को कई बार टोका और स्पष्ट कहा कि इस तरह की भाषा सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। बाद में अध्यक्ष ने इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश भी दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हस्तक्षेप करते हुए अध्यक्ष से आग्रह किया कि ऐसे शब्दों को रिकॉर्ड से हटाया जाए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी बार-बार खड़े होकर राहुल गांधी को नियमों की याद दिलाई और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए।

गृह मंत्री पर आरोप, सरकार का पलटवार

राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोली और पैलेट गन चलाने की अनुमति दी थी। इस आरोप पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने इसे पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि इस प्रकार का गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत में गोली चलाने का आदेश कोई केंद्रीय मंत्री नहीं, बल्कि संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी (DM) या उप जिलाधिकारी (SDM) देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चली थी, बल्कि केवल आंसू गैस का प्रयोग किया गया था। उन्होंने राहुल गांधी पर तथ्यों के बिना सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था शिक्षा मंत्रालय नहीं, बल्कि RSS चला रहा है और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल दिखावा है। राहुल ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उनके मुताबिक सरकार युवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था देने में विफल रही है।

“देश का भविष्य सड़कों पर है”

राहुल गांधी ने छात्रों के हालिया आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि सड़कों पर उतरे छात्र गुस्से या नफरत से नहीं, बल्कि अपने भविष्य और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता अपने बच्चों से पूछें कि वे इन आंदोलनों के बारे में क्या सोचते हैं, तो उन्हें भी छात्रों के समर्थन में जवाब मिलेगा। राहुल ने कहा कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।

सरकार का राजनीतिक जवाब

जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें सार्वजनिक जीवन का अनुभव नहीं है और वे तथ्यों की जांच किए बिना आरोप लगाते हैं। उन्होंने 21 जुलाई के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी शुरुआत में आंदोलन से दूर रहे, लेकिन बाद में “FOMO” (Fear of Missing Out) के कारण उसमें शामिल हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के जरिए केवल राजनीतिक संदेश देना चाहते थे।

लोकसभा में विधेयक पारित होने के साथ सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष का कहना है कि कानून बनाने से ज्यादा जरूरी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित करना है। पेपर लीक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना रहने के संकेत दे रहा है।

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

और भी पढ़ें

WhatsApp