
भगवान बुद्ध का करुणा, अहिंसा और शांति का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक : केशव प्रसाद मौर्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर मिल रही नई पहचान
सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत की सांस्कृतिक विरासत का ऐतिहासिक सम्मान
लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी के सारनाथ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का करुणा, अहिंसा, शांति और मानव कल्याण का संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। वैश्विक अस्थिरता, संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों के वर्तमान दौर में भगवान बुद्ध के कालजयी विचार शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में भारत की करुणा, अहिंसा और शांति की अमूल्य विरासत को विश्वभर में नई ऊर्जा और नई पहचान मिली है। भारत आज अपनी प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को प्रभावी ढंग से विश्व समुदाय के सामने प्रस्तुत करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार कर रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक वैश्विक सम्मान है। यह उपलब्धि न केवल भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि सारनाथ की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।
उन्होंने कहा कि सारनाथ वह पावन भूमि है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद प्रथम धर्मदेशना देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। यहीं से करुणा, सत्य, अहिंसा, मैत्री और मानव कल्याण का संदेश विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा। आज भी सारनाथ दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, ज्ञान और शांति का प्रमुख केंद्र है।
श्री मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं किसी एक देश, समाज या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने मानव जीवन में करुणा, सहिष्णुता, आत्मसंयम और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोच्च महत्व दिया। उनके विचारों को अपनाकर विश्व में स्थायी शांति, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल रही है। भारत अपने प्राचीन ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों को विश्व समुदाय के साथ साझा कर मानवता के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व भगवान बुद्ध के महान संदेशों को स्मरण करने और उन्हें जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिवस हमें सत्य, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के महासचिव शार्त्से खेनसुर, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज़ के कुलपति डॉ. वांगचुक दोर्जी नेगी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, इंडिया-श्रीलंका इंटरनेशनल बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. के. श्री सुमेधा थेरो सहित अनेक सम्मानित भिक्षु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।







