Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

युवाओं के सुरक्षित भविष्य और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम : केशव प्रसाद मौर्य

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Bureau Report

युवाओं के सुरक्षित भविष्य और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम : केशव प्रसाद मौर्य

पेपर लीक और अनुचित साधनों का सहारा लेने वाले दोषियों को मिलेगी त्वरित व कड़ी सजा

युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वालों को कोई रियायत नहीं : केशव प्रसाद मौर्य

Advertisement Box

लखनऊ, 29 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में लोकसभा में प्रस्तुत ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026’ युवाओं के सुरक्षित भविष्य और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। जांच को दो माह के भीतर पूरा करने, आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन माह के भीतर मुकदमे का निस्तारण करने तथा विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालयों के माध्यम से दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा दिलाने की व्यवस्था की गई है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी तथा मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

श्री मौर्य ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि युवाओं के सपनों और उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। प्रत्येक प्रतिभाशाली छात्र-छात्रा को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना और उनके उज्ज्वल भविष्य की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लगातार ठोस और निर्णायक कदम उठा रही है। यह विधेयक न केवल युवाओं का विश्वास मजबूत करेगा, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था को भी अधिक जवाबदेह और सशक्त बनाएगा।

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

WhatsApp