Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

नई दिल्ली: ईडी की बड़ी कार्रवाई जीवन सुरक्षा ग्रुप की ₹5.54 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 6.88 लाख निवेशकों से ₹403 करोड़ की ठगी का आरोप

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Bureau Report

नई दिल्ली: ईडी की बड़ी कार्रवाई जीवन सुरक्षा ग्रुप की ₹5.54 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 6.88 लाख निवेशकों से ₹403 करोड़ की ठगी का आरोप

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने 10 जुलाई 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जीवन सुरक्षा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उसके निदेशकों की ₹5.54 करोड़ की चल व अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्वोत्तर भारत में फैले एक कथित पोंजी और मनी सर्कुलेशन नेटवर्क के खिलाफ चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है।

Advertisement Box

ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में 48 बैंक खातों में जमा लगभग ₹1.42 करोड़ नकद राशि शामिल है। इसके अतिरिक्त असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में स्थित 22 अचल संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं, जिनका अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹4.11 करोड़ बताया गया है। एजेंसी का कहना है कि ये सभी संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित आय का हिस्सा हैं।

यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और एसीबी गुवाहाटी द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978 के तहत दर्ज एफआईआर व आरोप पत्र के आधार पर शुरू की गई थी। गौरतलब है कि इस मामले की जांच पहले असम सीआईडी और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) भी कर चुके हैं, जो इस मामले की गंभीरता और बहुस्तरीय जटिलता को दर्शाता है।

जांच में सामने आया कि जीवन सुरक्षा ग्रुप ने अपनी तीन प्रमुख सहयोगी कंपनियों – जीवन सुरक्षा रियल एस्टेट लिमिटेड, जीवन सुरक्षा एसोसिएट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और जीवन सुरक्षा एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड – के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 422 शाखाओं और एजेंटों के विशाल नेटवर्क के जरिए यह योजना संचालित की। समूह ने रिकरिंग व फिक्स्ड डिपॉजिट, प्लॉट बुकिंग, उत्पाद आधारित योजनाओं, मासिक आय योजना और रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर जैसे प्रलोभनों के नाम पर अत्यधिक रिटर्न का वादा कर निवेशकों को आकर्षित किया। ईडी का आरोप है कि कंपनी के पास जनता से जमा राशि स्वीकार करने का कोई वैध लाइसेंस या अनुमति नहीं थी।

जांच के अनुसार, समूह ने कथित तौर पर लगभग 6.88 लाख निवेशकों से करीब ₹403.63 करोड़ जुटाए। इनमें से केवल ₹132.72 करोड़ ही निवेशकों को वापस किए गए, जबकि शेष राशि का उपयोग नए निवेशकों को जोड़ने और योजना को चलाए रखने में किया गया — जो एक क्लासिक पोंजी संरचना की पहचान है। ईडी का अनुमान है कि इस प्रक्रिया से करीब ₹270.91 करोड़ की अपराध से अर्जित आय उत्पन्न हुई।

एजेंसी के अनुसार, निवेशकों से एकत्र धन को पहले कंपनी के खातों से निकालकर निदेशकों और उनके परिजनों के व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद नकद निकासी, बीमा पॉलिसियों, फिक्स्ड डिपॉजिट और विभिन्न कंपनियों के बीच लेनदेन के माध्यम से धन की लेयरिंग की गई और अंततः इसे विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश कर दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में पोंजी योजनाओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयां लगातार तेज हो रही हैं। ईडी ने स्पष्ट किया है कि धन शोधन के पूरे नेटवर्क, संबंधित व्यक्तियों और संपत्तियों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी रहेगी।

आज का राशिफल

वोट करें

भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के बाद कांग्रेस ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। क्या सरकार को इस पर विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

WhatsApp