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E20 के बाद अब E25 की बारी? सरकार क्यों बढ़ा रही है धीरे-धीरे कदम

सरकार लाने वाली है E25, E30 और E85 वाला फ्यूल
सरकार लाने वाली है E25, E30 और E85 वाला फ्यूल
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद अब चर्चा E25, E30 और भविष्य में E85 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन की शुरू हो गई है। हालांकि सरकार फिलहाल E25 को जल्दबाजी में लागू करने के मूड में नहीं दिख रही। इसकी सबसे बड़ी वजह देश में पहले से चल रही करोड़ों पुरानी गाड़ियां हैं, जिनकी तकनीक 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार अब अगला कदम पूरी तकनीकी जांच और परीक्षण के बाद ही उठाना चाहती है।

भारत ने निर्धारित लक्ष्य से पहले पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने में सफलता हासिल की है। सरकार का मानना है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों को गन्ने और अन्य फसलों से बेहतर आय मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। यही वजह है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

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लेकिन E20 के बाद E25 लागू करना उतना आसान नहीं माना जा रहा। अप्रैल 2023 से पहले बनी अधिकांश गाड़ियां E10 पेट्रोल को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई थीं। अप्रैल 2023 से मार्च 2025 के बीच बनी गाड़ियां E20 के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद बने नए मॉडल पूरी तरह E20 कम्प्लायंट हैं। ऐसे में देश की सड़कों पर आज भी बड़ी संख्या में ऐसे वाहन मौजूद हैं, जो E25 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए तैयार नहीं हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना पर्याप्त तैयारी के E25 लागू किया गया तो माइलेज पर असर पड़ सकता है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए अधिक ब्लेंड वाले ईंधन में समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। पुराने इंजनों में यह असर और अधिक दिखाई दे सकता है।

तकनीकी स्तर पर भी कई चुनौतियां हैं। अधिक एथेनॉल पुराने वाहनों के रबर होज, सील, ओ-रिंग, फ्यूल पंप और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स को प्रभावित कर सकता है। इससे रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है और समय-समय पर पुर्जे बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि नई पीढ़ी के वाहनों में इस तरह की समस्याओं को काफी हद तक ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

ऑटोमोबाइल उद्योग का एक बड़ा वर्ग मानता है कि भविष्य में अलग-अलग ग्रेड का पेट्रोल उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वाहन मालिक अपनी गाड़ी के अनुसार ईंधन का चुनाव कर सकें। इसी के साथ फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFV) को भी भविष्य का समाधान माना जा रहा है। ये वाहन E20 से लेकर E85 तक किसी भी एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं।

फिलहाल सरकार ने E25 पर काम रोका नहीं है। E22, E25, E27 और E30 पर लगातार ट्रायल, इंजन परीक्षण और तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि E25 को पर्याप्त परीक्षण के बाद ही लागू किया जाएगा। यानी सरकार की योजना बरकरार है, लेकिन इस बार हर कदम पूरी तैयारी और वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर उठाया जाएगा।

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