
अमेरिका और ईरान के बीच तीन महीने से जारी युद्ध को रोकने की दिशा में बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी नेतृत्व के बीच अंतरिम शांति समझौते (MoU) पर आखिरकार दस्तखत हो गए हैं। फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में बुधवार रात आयोजित कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी इस मौके पर मौजूद रहे। हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने बाहर आकर कहा, “The deal’s all signed” यानी “डील पूरी तरह से साइन हो चुकी है।”
इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी तेहरान से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कर समझौते को अंतिम मंजूरी दे दी। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे इस समझौते के औपचारिक लागू होने का ऐलान किया गया।
14 सूत्रीय इस अंतरिम समझौते के तहत ईरान और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएगी। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा। साथ ही दोनों पक्ष अगले 60 दिनों तक स्थायी और व्यापक समझौते के लिए बातचीत जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि इस समझौते पर मूल रूप से 19 जून को स्विट्जरलैंड के लूसर्न शहर में हस्ताक्षर होने थे, लेकिन तय कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इसे अंतिम रूप दे दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेनेवा में आगे की तकनीकी और परमाणु वार्ताएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी।
समझौते के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होना अपने आप में गलत नहीं है। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिका की असली चिंता मिसाइलें नहीं बल्कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना है। उन्होंने दोहराया कि इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
हालांकि यह केवल एक अंतरिम समझौता है और कई अहम मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी बाकी है, लेकिन इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत देने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








