
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित उद्घाटन से पहले किया गया, जो 28 मार्च, 2026 को होने वाला है। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट का संचालन उच्चतम स्तर पर होना चाहिए और सभी प्रक्रियाओं में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट: उत्तर प्रदेश का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसे आमतौर पर जेवर एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश का एक महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा और इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा। यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट न केवल यात्रा को सुविधाजनक बनाएगा बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल
यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित की जा रही है। इसमें ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार की भागीदारी शामिल है।
इस प्रोजेक्ट का कंसेशन पीरियड 40 वर्षों का रखा गया है, जिसकी शुरुआत 1 अक्टूबर, 2021 से हुई थी। इस मॉडल के तहत निवेश और संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दी गई है, जबकि सरकार नियामक और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग सुनिश्चित करती है।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सभी मौसम में संचालन के लिए लाइसेंस प्राप्त है और इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे तैयार किया गया है। यह रनवे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और एडवांस्ड लाइटिंग सिस्टम से सुसज्जित है, जिससे 24 घंटे विमान संचालन संभव है। एयरपोर्ट में 24 कोड C और 2 कोड D/F श्रेणी के विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं। इससे बड़े वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट जैसे बोइंग 777-300ER भी आसानी से उतर सकेंगे।
चरणबद्ध विकास योजना
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ सालाना लगभग 12 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। पूरा एयरपोर्ट बन जाने के बाद, इसकी सालाना क्षमता लगभग 70 मिलियन यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जिससे यह भारत के प्रमुख एविएशन हब्स में शामिल हो जाएगा। चरणबद्ध विकास योजना से यह सुनिश्चित होगा कि यात्री सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स और वाणिज्यिक गतिविधियों में क्रमिक वृद्धि हो।
मल्टी-मॉडल कार्गो हब और कनेक्टिविटी
एयरपोर्ट में मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी विकसित किया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स और व्यापार को नई गति मिलेगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए ₹3,630.77 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के पूरा होने से एयरपोर्ट तक पहुंच और आसान होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योग और व्यापार क्षेत्र को सीधे लाभ मिलेगा।








