
अयोध्या में हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय (गोप जी) ने मीडिया से बातचीत कर एक गंभीर संदेश दिया। उनका कहना है कि हिंदुत्व की वर्तमान व्याख्या अब केवल सांकेतिक बन गई है और असली मुद्दों पर- जैसे संतों पर अत्याचार, मंदिरों की सुरक्षा और गोहत्या- मौन रहने तक सीमित हो गई है।
शंकराचार्य ने लंबे समय से सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। गंगा की निर्मलता, रामसेतु की रक्षा, मंदिर-मठों का संरक्षण और धार्मिक आयोजनों पर लगाए गए प्रतिबंध-इन सभी मामलों में उन्होंने लगातार अपनी आवाज उठाई है। यह केवल धार्मिक मुद्दों का संरक्षण नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की रक्षा का प्रतीक है।
देवेंद्र पांडेय ने यह भी बताया कि शंकराचार्य का अभियान असली और नकली संतों की पहचान करने पर केंद्रित है। 11 मार्च को लखनऊ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में यह साफ किया जाएगा कि कौन सनातन परंपरा का सच्चा प्रतिनिधि है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि कुछ लोग ऋषि-मुनियों के भेष में भ्रम फैला रहे हैं।
यह अभियान अयोध्या के संत समाज के लिए भी एक अपील है। पांडेय ने कहा कि अयोध्या के संतों को शंकराचार्य के साथ खड़ा होना चाहिए और सनातन धर्म, गंगा, गौमाता और दंडी संन्यासी परंपरा की रक्षा में योगदान देना चाहिए। यह केवल धार्मिक संघर्ष नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर की सुरक्षा का संदेश है।








