
प्रयागराज- बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज FIR के बाद प्रयागराज पुलिस पिछले तीन दिनों से वाराणसी में सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस फिलहाल उनके आश्रम तक नहीं पहुंची है और इस दौरान सबूत जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण जांच बेहद सतर्कता और रणनीति के साथ की जा रही है।
शंकराचार्य ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए हिंदुत्व को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि दिखावे के लिए खुद को हिंदू बताने वाले लोगों के कारण हिंदुत्व खतरे में है। साथ ही उन्होंने आरोपों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यदि अन्य छात्रों के साथ भी कोई अन्याय हुआ है, तो बाकी क्यों सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उचित समय पर सभी तथ्यों के साथ पेश किया जाएगा।
मामला तब शुरू हुआ जब माघ मेले-2026 के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। इसके आठ दिन बाद, 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए गए।
पुलिस कार्रवाई में देरी के आरोप के बाद 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने 13 फरवरी को दो बच्चों को पेश किया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज किए। उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई, जिसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी शामिल किए गए।
24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर पर साजिश का आरोप लगाया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेशनल काउंसिल सदस्य देव और समाजवादी पार्टी की पूर्व प्रत्याशी पूजा यादव समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने शंकराचार्य का समर्थन किया। उन्होंने आरोपों को गलत बताया और शंकराचार्य के साथ खड़े रहने की बात कही।
पुलिस की रणनीति से संकेत मिलता है कि शंकराचार्य और उनके आश्रम से पूछताछ तब ही की जाएगी जब सभी सबूत एकत्रित हो जाएंगे। हाई-प्रोफाइल मामले में सतर्कता बरतते हुए पुलिस ने अभी तक कोई अस्थायी गिरफ्तारी या दबाव की कार्रवाई नहीं की है।








