Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

उत्तर कोरिया में संभावित उत्तराधिकार: परिवारवाद, सत्ता और अनिश्चित भविष्य

किम जोंग
किम जोंग
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

उत्तर कोरिया की राजनीति हमेशा रहस्य, नियंत्रण और परिवार-केंद्रित सत्ता संरचना के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब चर्चा इस बात की है कि यदि मौजूदा नेता किम जोंग-उन के बाद सत्ता किसे मिलेगी- उनकी बहन किम यो-जोंग को या उनकी किशोर बेटी किम जू-ऐ को। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

किम जोंग-उन हाल के वर्षों में अपनी बेटी को सार्वजनिक कार्यक्रमों, मिसाइल परीक्षणों और सैन्य परेड में साथ लेकर दिखाई दिए हैं। यह संकेत देता है कि वे उत्तराधिकार की लंबी तैयारी कर सकते हैं। उत्तर कोरिया में सत्ता केवल राजनीतिक पद नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक विरासत है-किम परिवार की निरंतरता का प्रतीक। दादा किम इल-सुंग से लेकर पिता किम जोंग-इल और फिर किम जोंग-उन तक सत्ता वंशानुगत रूप से चली है। ऐसे में बेटी को आगे लाना परंपरा का विस्तार भी हो सकता है।

Advertisement Box

लेकिन हकीकत यह है कि किम जू-ऐ अभी बेहद कम उम्र की हैं। सत्ता संभालने के लिए अनुभव, पार्टी और सेना पर पकड़, तथा आंतरिक शक्ति-संतुलन को साधने की क्षमता जरूरी होती है। यही वह जगह है जहां किम यो-जोंग का नाम सबसे आगे आता है। वे लंबे समय से पार्टी के प्रचार और संगठन तंत्र में प्रभावशाली भूमिका निभा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी वे अपने भाई की विश्वसनीय प्रतिनिधि रही हैं। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ तीखे बयानों से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध पर सख्त रुख तक, उन्होंने खुद को कठोर और निर्णायक नेता के रूप में स्थापित किया है।

इतिहास गवाह है कि उत्तर कोरिया में सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण नहीं रहा। 2011 में सत्ता संभालने के बाद किम जोंग-उन ने अपने चाचा को फांसी दिलवाई और सौतेले भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हुई। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि संभावित प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाना इस व्यवस्था का हिस्सा रहा है। इसलिए यदि उत्तराधिकार को लेकर अस्पष्टता बनी रहती है, तो सत्ता संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल किम जोंग-उन की उम्र अधिक नहीं है, लेकिन उनकी सेहत को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यदि अचानक सत्ता खाली होती है, तो स्वाभाविक रूप से अनुभवी और स्थापित चेहरा-किम यो-जोंग-सबसे मजबूत दावेदार बन सकती हैं। हालांकि, यदि उत्तराधिकार की प्रक्रिया नियंत्रित और योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ती है, तो किम जू-ऐ को भविष्य की नेता के रूप में तैयार किया जा सकता है।

उत्तर कोरिया की बंद व्यवस्था में सटीक जानकारी मिलना मुश्किल है, खासकर कोविड-19 के बाद जब देश और भी अधिक अलग-थलग हो गया है। ऐसे में हर सार्वजनिक संकेत का राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि किम परिवार की चौथी पीढ़ी सत्ता संभालेगी या फिर सत्ता एक बार फिर अनुभव और ताकत के आधार पर तय होगी।

वंशवाद बनाम शक्ति संतुलन: क्या उत्तर कोरिया पहली महिला सर्वोच्च नेता की ओर बढ़ रहा है?

उत्तर कोरिया की राजनीति का सबसे बड़ा सत्य यह है कि वहां संस्थाओं से अधिक व्यक्ति और परिवार महत्वपूर्ण हैं। किम परिवार ने सात दशकों से अधिक समय तक सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखा है। आज सवाल यह नहीं कि सत्ता परिवार के बाहर जाएगी या नहीं, बल्कि यह है कि परिवार के भीतर किसे मिलेगी।

किम जू-ऐ की सार्वजनिक उपस्थिति ने संकेत दिया है कि उन्हें भविष्य की भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है। सैन्य कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी प्रतीकात्मक है- यह संदेश कि अगली पीढ़ी भी सेना और परमाणु शक्ति की संरक्षक होगी। यदि ऐसा होता है, तो उत्तर कोरिया पहली बार किसी महिला को सर्वोच्च पद पर देख सकता है। यह ऐतिहासिक बदलाव होगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यवस्था की प्रकृति बदलेगी।

दूसरी ओर, किम यो-जोंग पहले से ही सत्ता के गलियारों में मजबूत स्थिति रखती हैं। वे संगठन और मार्गदर्शन विभाग तथा प्रचार तंत्र में प्रभावशाली रही हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी उनकी भूमिका अहम रही है, खासकर 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ शिखर वार्ता की तैयारियों में। उन्हें अक्सर अपने भाई की विश्वसनीय सलाहकार कहा जाता है।

यदि अचानक सत्ता परिवर्तन होता है, तो पार्टी और सेना के वरिष्ठ अधिकारी स्थिरता के लिए अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता दे सकते हैं। ऐसे में किम यो-जोंग का पलड़ा भारी रहेगा। लेकिन यदि किम जोंग-उन दीर्घकालिक रणनीति अपनाते हैं और अपनी बेटी को धीरे-धीरे आधिकारिक पदों पर स्थापित करते हैं, तो शक्ति संतुलन उनके पक्ष में बनाया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना होगा कि उत्तर कोरिया में वैचारिक प्रचार बहुत महत्वपूर्ण है। यदि राज्य मीडिया किम जू-ऐ को ‘प्रिय उत्तराधिकारी’ के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर देता है, तो जनता और पार्टी ढांचे को उसी दिशा में ढाला जा सकता है।

अंततः यह संघर्ष केवल दो व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि अनुभव बनाम विरासत, तात्कालिक स्थिरता बनाम दीर्घकालिक वंश परंपरा के बीच होगा। उत्तर कोरिया की राजनीति में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि किम परिवार की अगली चाल क्या होगी-एक अनुभवी ‘आयरन लेडी’ का उदय या चौथी पीढ़ी की नियंत्रित ताजपोशी। जो भी हो, यह स्पष्ट है कि उत्तर कोरिया में सत्ता परिवर्तन केवल आंतरिक मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डालने वाली घटना होगी।

 

 

<span style=उत्तर कोरिया में संभावित उत्तराधिकार: परिवारवाद, सत्ता और अनिश्चित भविष्य">
आज फोकस में

उत्तर कोरिया में संभावित उत्तराधिकार: परिवारवाद, सत्ता और अनिश्चित भविष्य

बोर्ड परीक्षा और बढ़ता पारिवारिक दबाव: क्या हम बच्चों को डरा रहे हैं?
आज फोकस में

बोर्ड परीक्षा और बढ़ता पारिवारिक दबाव: क्या हम बच्चों को डरा रहे हैं?

स्मार्ट मीटर के बढ़े बिल से आक्रोश- उपभोक्ता ने कर्मचारी के सामने ही मीटर तोड़ा
आज फोकस में

स्मार्ट मीटर के बढ़े बिल से आक्रोश- उपभोक्ता ने कर्मचारी के सामने ही मीटर तोड़ा

संपादकीय: इलॉन मस्क का चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री और डिजिटल भविष्य का विज़न
आज फोकस में

संपादकीय: इलॉन मस्क का चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री और डिजिटल भविष्य का विज़न

पुलिस का मास्टर प्लान: अब साइबर मुख्यालय में बैठेंगे बैंकों के प्रतिनिधि, सेकंडों में होल्ड होगा पैसा
आज फोकस में

पुलिस का मास्टर प्लान: अब साइबर मुख्यालय में बैठेंगे बैंकों के प्रतिनिधि, सेकंडों में होल्ड होगा पैसा

महंत राजू दास का बेबाक इंटरव्यू, कई बड़े खुलासे
आज फोकस में

महंत राजू दास का बेबाक इंटरव्यू, कई बड़े खुलासे

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

Advertisement Box
WhatsApp