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दानिश सिद्दीक़ी: अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय पत्रकार की मौत

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दानिश सिद्दीक़ी: अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय पत्रकार की मौत

अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान से लगी सीमा पर भारत के एक वरिष्ठ फ़ोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीक़ी की अफ़ग़ान सुरक्षा बलों और तालिबान लड़ाकों के बीच संघर्ष में मौत हो गई है।

दानिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स के पत्रकार थे. रॉयटर्स ने उनकी मौत की पुष्टि की है और अधिकारियों के हवाले से बताया है कि संघर्ष के दौरान एक वरिष्ठ अफ़ग़ान अधिकारी की भी मौत हो गई।

एक अफ़ग़ान कमांडर ने रॉयटर्स को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान के विशेष सुरक्षाबल की टुकड़ी स्पिन बोल्डक शहर के मुख्य बाज़ार को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही थी जब तालिबान के साथ मुठभेड़ हुई जिसमें दानिश और अफ़ग़ान अधिकारी की मौत हो गई।

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रॉयटर्स के मुताबिक़ दानिश इस सप्ताह से अफ़ग़ानिस्तान के विशेष बल के साथ कंधार प्रांत में तैनात थे जहाँ से वो अफ़ग़ान कमांडो और तालिबान लड़ाकों के बीच संघर्ष की ख़बरें भेज रहे थे.

रॉयटर्स के प्रमुख माइकल फ़्रीडेनबर्ग और मुख्य संपादक अलेस्सांद्रा गैलोनी ने एक बयान में कहा है कि वो इस बारे और जानकारी जुटा रहे हैं और क्षेत्र में अधिकारियों के संपर्क में हैं।

रॉयटर्स का बयान

माइकल फ़्रीडेनबर्ग और अलेस्सांद्रा गैलोनी ने कहा, “दानिश एक बेहतरीन पत्रकार थे, एक अच्छे पति और पिता थे. वे सहयोगियों के बीच बेहद लोकप्रिय थे. इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।

रॉयटर्स ने कहा है कि “लड़ाई कवर करने के दौरान गोलाबारी में उनके घायल होने की जानकारी मिली थी. स्पिन बोल्डक में जब तालिबान के लड़ाके लड़ाई से पीछे हटे थे तो उस वक़्त उनका इलाज चल रहा था और वे ठीक हो रहे थे।

इससे पहले भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फ़रीद मामुन्दजई ने दानिश सिद्दीक़ी के मारे जाने के ख़बर की पुष्टि की थी।

उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है कि “कल रात कंधार में अपने दोस्त दानिश सिद्दीक़ी के मारे जाने की दुःखद ख़बर से आहत हूँ. पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता भारतीय पत्रकार अफ़ग़ान सुरक्षाबलों के साथ थे. मैं उनसे दो हफ़्ते पहले मिला था, जब वे काबुल जा रहे थे. उनके परिवार और रॉयटर्स के लिए मेरी संवेदनाएँ।

अफ़ग़ानिस्तान के टीवी चैनल टोलो न्यूज़ के अनुसार, दानिश की मौत कंधार के स्पिन बोल्डक ज़िले में संघर्ष को कवर करने के दौरान हुई।

तालिबान ने बुधवार को स्पिन बोल्डक शहर और वहाँ पाकिस्तान से लगी एक महत्वपूर्ण सीमा चौकी पर नियंत्रण कर लिया था।

रोहिंग्या शरणार्थी संकट की कवरेज के लिए फीचर फोटोग्राफी कैटगिरी में उनकी टीम को साल 2018 का पुलित्ज़र सम्मान मिला था

साल 2018 में मिला था पुलित्ज़र पुरस्कार

दानिश सिद्दीक़ी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के चीफ़ फ़ोटोग्राफ़र थे और वे पिछले कुछ दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष और तनाव को कवर कर रहे थे. उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर पिछले दिनों लगातार वहाँ की स्थिति का ब्यौरा दिया था और बताया था कि कैसे एक हमले में वे बाल-बाल बचे थे।

दानिश सिद्दीक़ी अभी मुंबई स्थित थे जहाँ वो भारत में रॉयटर्स पिक्चर्स की मल्टीमीडिया टीम के प्रमुख थे।

रोहिंग्या शरणार्थी संकट की कवरेज के लिए फीचर फोटोग्राफी कैटगिरी में उनकी टीम को साल 2018 का पुलित्ज़र सम्मान मिला था. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ की जंग के अलावा कोरोना महामारी, नेपाल भूकंप और हॉन्ग-कॉन्ग के विरोध प्रदर्शनों को कवर किया था।

उन्होंने दिल्ली के जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री ली थी. साल 2007 में उन्होंने जामिया के ही एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था।

उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत एक टीवी न्यूज़ संवाददाता के तौर पर की. बाद में वो फ़ोटो जर्नलिस्ट बन गए और वर्ष 2010 में रॉयटर्स में बतौर इंटर्न काम शुरू किया।

‘सरकार से अपील’

दानिश सिद्दीक़ी के निधन पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “दानिश सिद्दीक़ी अपने पीछे असाधारण उपलब्धियों की विरासत छोड़ गए हैं. उन्होंने फोटोग्राफ़ी के लिए पुलित्ज़र सम्मान हासिल किया था और वे कंधार में अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के साथ काम कर रहे थे. उनकी एक तस्वीर शेयर कर रहा हूं. शोक प्रकट करता हूं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि “दानिश सिद्दीक़ी के परिवार और दोस्तों के साथ से मेरी संवेदनाएं हैं. मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि उनके पार्थिव शरीर को जितनी जल्दी हो सके, वापस घर लाया जाए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दानिश सिद्दीक़ी के निधन पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा, “दानिश सिद्दीक़ी के असमय निधन का मुझे बेहद अफसोस है. उन्होंने अपने कैमरे के ज़रिए महामारियों से होने वाली बर्बादी, सामूहिक हत्याओं और मानवीय संकटों को हमारे सामने रखा था. उनकी मृत्यु एक बार फिर से दुनिया को ये संदेश देती है कि किसी भी किस्म की हिंसा और चरमपंथ को ख़त्म किया जाए।

कॉमेडी आर्टिस्ट कुणाल कामरा ने कहा, “ऐसे वक़्त में जब हमारी भावनाएं विज़ुअल्स पर ज़्यादा निर्भर हो गई हैं, उन्होंने संवेदना, गरिमा और सौंदर्यबोध के साथ हमारे दिलोदिमाग पर चस्पा हो जाने वाली तस्वीरें खींचीं थी. हमारे समय को तस्वीरें में दिखलाने के लिए आपका शुक्रिया दानिश सिद्दीक़ी, ये हमेशा ज़िंदा रहेंगी. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे।

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