
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में 5 से 10 नवंबर तक दीपावली एवं अन्नकूट महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। छह दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में गौपूजन, धनतेरस, हनुमान पूजन, दीपोत्सव, लक्ष्मी पूजन और गोवर्धन पूजन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 10 नवंबर को होने वाला अन्नकूट दर्शन होगा, जिसमें भगवान को 1,256 प्रकार के सात्त्विक एवं शाकाहारी व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया जाएगा।
परम पूज्य महंतस्वामी महाराज की प्रेरणा से आयोजित होने वाले इस महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर को आकर्षक रंगोलियों, फूलों, रंग-बिरंगी पताकाओं और दीपों से सजाया जा रहा है। आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मंदिर के मुख्य प्रभारी संत पूज्य धर्मवत्सल दास स्वामी ने बताया कि अक्षरधाम संस्थान के विश्वभर में स्थित लगभग 1,800 मंदिरों में प्रतिवर्ष दीपावली और अन्नकूट उत्सव श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत दिल्ली अक्षरधाम में भी इस वर्ष व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महोत्सव की तैयारियों में हजारों स्वयंसेवक सेवा दे रहे हैं।
महोत्सव की शुरुआत 5 नवंबर को गौवत्स एकादशी के अवसर पर सुबह 10 बजे गौमाता के विशेष पूजन और आरती के साथ होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पर शाम 6:15 बजे लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। वहीं, 7 नवंबर को रूप चौदस के अवसर पर शाम 6:15 बजे हनुमान जी महाराज का पूजन होगा।
8 नवंबर को दीपावली एवं शारदा पूजन के अवसर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक पारंपरिक बही-खाता पूजन आयोजित होगा। इसके बाद शाम 7 बजे मंदिर परिसर में विशेष दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
महोत्सव के अंतिम चरण में 10 नवंबर को गोवर्धन पूजन और अन्नकूट उत्सव आयोजित होगा। सुबह 11 बजे गोवर्धन पूजन के बाद दोपहर 12 बजे से शाम 6:30 बजे तक श्रद्धालु भगवान के दिव्य अन्नकूट दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान ठाकुरजी के समक्ष 1,256 प्रकार के शुद्ध सात्त्विक एवं शाकाहारी व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा।
स्वामिनारायण संप्रदाय में भगवान स्वामिनारायण के समय से ही दीपावली और अन्नकूट जैसे पर्वों को विशेष श्रद्धा एवं परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाने की परंपरा रही है। बीएपीएस (BAPS) के मंदिरों में आज भी इस परंपरा का निरंतर पालन किया जा रहा है। संतों-महंतों की उपस्थिति में आयोजित होने वाला यह छह दिवसीय महोत्सव धार्मिक आस्था, सेवा और भक्ति का प्रमुख आयोजन होगा।









