
नई दिल्ली। पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से कथित दुष्कर्म के दावे के बाद भड़के बवाल पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित हॉस्टल महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह होनी चाहिए। यदि छात्राएं हॉस्टल में भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। दीपके ने महिलाओं की सुरक्षा को बुनियादी जरूरत बताते हुए कहा कि इसके लिए उन्हें प्रदर्शन या संघर्ष करने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने सोमवार, 28 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एलपीयू से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “यूनिवर्सिटी कैंपस का हॉस्टल महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह होनी चाहिए। अगर महिलाएं हॉस्टल में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं तो हमारे साथ गंभीर दिक्कत है। यह 2026 है। महिलाओं को सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए प्रदर्शन करना या लड़ाई करने की जरूरत न पड़े।”
दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एलपीयू परिसर में छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की खबर सामने आने के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात बाधित कर दिया। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है।
क्या है एलपीयू में बवाल का पूरा मामला?
पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में शनिवार देर रात से छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। रविवार सुबह तक प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। छात्रों के बीच यह दावा फैल गया कि विश्वविद्यालय के गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ बाहरी व्यक्ति ने दुष्कर्म किया है। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी सामने आने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की।
इसी दावे के बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुट गए। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। परिसर में खिड़कियों के शीशे तोड़े गए और कई जगह तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी जाम लगा दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
हालांकि, घटना को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अलग पक्ष रखा। एलपीयू ने कथित दुष्कर्म की खबरों को अफवाह बताते हुए छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें। विश्वविद्यालय ने लोगों से आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर ही विश्वास करने को कहा।
पुलिस पर पथराव, कई जवान घायल
रविवार शाम को प्रदर्शन के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और उनके वाहनों को निशाना बनाया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया।
एडीजीपी एमएफ फारूकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। अधिकारियों के मुताबिक, बाद में हालात नियंत्रण में आ गए। हालांकि, घटना के दौरान हुई तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
मामले की जांच के लिए SIT गठित
कथित दुष्कर्म के मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित लोगों के बयानों की पड़ताल की जाएगी। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि छात्रा के साथ कथित घटना की वास्तविकता क्या है और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा पुलिस को इसकी जानकारी कब मिली। जांच में इन पहलुओं के साथ यह भी देखा जाएगा कि घटना को लेकर फैली सूचनाओं के बाद परिसर में इतनी बड़ी संख्या में छात्र कैसे जुटे और विरोध प्रदर्शन हिंसक कैसे हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
एलपीयू में हुए घटनाक्रम ने विश्वविद्यालयों और हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। हॉस्टल को छात्राओं के लिए सुरक्षित आवास माना जाता है। ऐसे में परिसर के भीतर किसी छात्रा के साथ कथित यौन अपराध का दावा सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, इस मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में इसी चिंता को रेखांकित किया है। उनका कहना है कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना संस्थानों की जिम्मेदारी है। सुरक्षा ऐसी बुनियादी जरूरत है, जिसके लिए छात्राओं को आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।
फिलहाल, एलपीयू परिसर में हुए बवाल और कथित दुष्कर्म के दावे की जांच जारी है। पुलिस की SIT मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि घटना में क्या हुआ था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।






