
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कारोबार के दौरान भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में दबाव नजर आया। बाजार में बिकवाली के बीच बीमा कंपनियों और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े शेयरों पर खास तौर पर दबाव रहा। इस गिरावट के पीछे कई बाजार कारक हैं, लेकिन इंश्योरेंस सेक्टर को लेकर भारतीय बीमा नियामक IRDAI के नए प्रस्ताव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
IRDAI ने 23 सितंबर को ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम से एक व्यापक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें बीमा की बिक्री और वितरण व्यवस्था में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें कमीशन व्यवस्था में बदलाव, इंश्योरेंस कंपनियों के खर्चों पर नियंत्रण, मिस-सेलिंग पर सख्ती और ग्राहकों को ज्यादा पारदर्शिता देने जैसे कदम शामिल हैं।
कमीशन पर प्रस्तावित नियंत्रण से क्यों बढ़ी चिंता?
IRDAI ने कमीशन को एक समान तरीके से तय करने के बजाय बीमा के प्रकार, वितरण चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत के आधार पर सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं को अपनी कमीशन नीतियों और स्ट्रक्चर की जानकारी आसान भाषा में सार्वजनिक करने का प्रस्ताव है।
नियामक ने इंश्योरेंस कंपनियों के Expense of Management यानी EoM को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव रखा है। जीवन बीमा कंपनियों के लिए कंपनी-स्तर पर EoM सीमा को पांच साल में 12.5 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है। वहीं सामान्य बीमा कंपनियों के लिए यह सीमा पांच साल में 20 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है।
बैंकों की बीमा बिक्री पर भी नजर
IRDAI के प्रस्ताव में बैंकिंग चैनल के जरिए बीमा बिक्री को लेकर भी चिंता जताई गई है। नियामक ने खास तौर पर ऐसे मामलों पर ध्यान दिया है जहां बैंक या अन्य संस्थान लोन के साथ बीमा उत्पाद जोड़ते हैं। प्रस्ताव में ग्राहकों की जरूरत और उपयुक्तता के आधार पर बिक्री सुनिश्चित करने और मिस-सेलिंग पर निगरानी मजबूत करने की बात कही गई है।
IRDAI के मुताबिक, कुछ मामलों में डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाले भुगतान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से नियामक वितरण लागत को नियंत्रित करने और बीमा कारोबार को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बदलाव चाहता है।
‘डार्क पैटर्न’ पर भी सख्ती का प्रस्ताव
प्रस्ताव में बीमा वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले कथित ‘डार्क पैटर्न’ पर रोक लगाने की बात भी कही गई है। इसका मतलब ऐसे डिजाइन या तरीके हैं जो ग्राहक को उसकी मूल मंशा के विपरीत कोई कार्रवाई करने के लिए प्रेरित या भ्रमित कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी पॉलिसी की कीमत या फीचर्स देखने से पहले ग्राहक से निजी जानकारी मांगना भी नियामक के निशाने पर है।
बाजार पर असर क्यों दिखा?
निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो इंश्योरेंस कंपनियों, ब्रोकरों और डिजिटल इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई का मौजूदा मॉडल प्रभावित हो सकता है। खासकर उन कंपनियों पर असर की आशंका जताई जा रही है जिनका कारोबार वितरण कमीशन और नए ग्राहकों को जोड़ने की लागत पर काफी निर्भर है। गुरुवार को बीमा शेयरों में दबाव इसी चिंता के बीच देखा गया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि IRDAI का प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है। नियामक ने इस कंसल्टेशन पेपर पर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं और प्रतिक्रिया देने की समयसीमा 25 अक्टूबर 2026 तक है। इसलिए अंतिम नियमों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
यानी बाजार की मौजूदा गिरावट को केवल IRDAI के प्रस्ताव से जोड़ना सही नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि बीमा वितरण व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों ने निवेशकों को भविष्य की कमाई, कमीशन और वितरण लागत को लेकर नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया और IRDAI की अंतिम दिशा बाजार के लिए अहम संकेत बन सकती है।






