
उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक अमला प्रभावित क्षेत्रों में पूरी मुस्तैदी के साथ जुटा हुआ है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक बाढ़ के कारण जनहानि और पशुहानि शून्य रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ ही उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्यों के लिए अब तक 1,634 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1,072 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं, जो प्रभावित इलाकों में लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। वहीं, राहत और बचाव अभियान के लिए 2,161 नावों और मोटरबोटों को लगाया गया है। प्रशासन की ओर से अब तक 19,496 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इनके लिए प्रदेशभर में 1,315 शरणालय बनाए गए हैं।
राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में भोजन की व्यवस्था के लिए अब तक 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों को 1.11 लाख से अधिक सूखा राहत किट उपलब्ध कराई गई हैं। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 6.68 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.60 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए हैं।
बाढ़ के कारण प्रदेश में अब तक 1,490 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इनमें से 1,272 मामलों में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि क्षतिग्रस्त मकानों और प्रभावित परिवारों का आकलन कर जल्द से जल्द आवश्यक सहायता पहुंचाई जाए।
फिलहाल प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन जिलों में प्रशासनिक टीमें लगातार जलस्तर, राहत कार्यों और प्रभावित आबादी की निगरानी कर रही हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री तथा चिकित्सा सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।







