
लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था से लेकर सामाजिक सौहार्द तक कई मुद्दों पर प्रदेश सरकार को घेरा। लखनऊ पब्लिक स्कूल में आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम में पहुंचे अखिलेश यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2027 में यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो मर्जर के नाम पर बंद किए गए 26 हजार सरकारी स्कूलों को दोबारा खोला जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि पूरे समाज को सही रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बंद करना बच्चों और प्रदेश के भविष्य के लिए अच्छा कदम नहीं है। सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि स्कूलों के मर्जर के कारण बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालय बंद हुए हैं और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तथा शिक्षकों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बंद किए गए स्कूलों को दोबारा खोला जाएगा। अखिलेश यादव ने अपने पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कहा कि वे स्वयं शिक्षक थे और शिक्षा के महत्व को समझते थे। उनके मुताबिक, मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विस्तार पर जोर दिया था और हर ग्राम सभा में स्कूल खोलने की दिशा में काम किया था।
अखिलेश यादव ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि आज सरकारी स्कूल की तस्वीर लेने और शिक्षक से बच्चे की पढ़ाई के बारे में सवाल पूछने को लेकर भी स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि स्कूल की तस्वीर लेने पर जेल जाने का डर पैदा हो गया है। अखिलेश ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को सवाल पूछने और अपने अधिकारों को समझने के लिए तैयार करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग सवाल करने वाली पीढ़ी से डरते हैं, वे शिक्षा को मजबूत नहीं कर सकते। अखिलेश यादव ने कहा कि बच्चा पढ़ा-लिखा होगा तो वह सवाल करेगा और लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है।
शिक्षक दिवस के मंच से अखिलेश यादव ने सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्म और उसकी आस्था का सम्मान करना जरूरी है। अखिलेश के मुताबिक, सच्चा सनातनी कभी दूसरे का अपमान नहीं कर सकता। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की भावना पूरे विश्व को एक परिवार मानने की है।
उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि समाज में सौहार्द बनाए रखना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होना चाहिए। अखिलेश यादव ने सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ मामलों को राजनीतिक तथा सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने धार्मिक मुद्दे पर बोलते हुए भगवान श्रीराम के नाम पर चढ़ावे और धन से जुड़े कथित मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई के बाद राजनीतिक दबाव बनाने के लिए दूसरे मुद्दों को सामने लाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या संबंधित पक्षों को न्याय पाने के लिए अदालतों का रास्ता नहीं मिलना चाहिए था।
शिक्षक दिवस के मौके पर दिए गए अखिलेश यादव के बयान को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा अध्यक्ष ने शिक्षा, सरकारी स्कूल, शिक्षक और बच्चों के भविष्य को लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा सामने रखा है। 26 हजार स्कूलों को दोबारा खोलने का ऐलान इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश सरकार अखिलेश यादव के आरोपों और स्कूलों को दोबारा खोलने के वादे पर क्या जवाब देती है। वहीं, 2027 के चुनाव से पहले शिक्षा और सरकारी स्कूलों का मुद्दा यूपी की राजनीति में कितना प्रभाव पैदा करता है, इस पर भी नजर रहेगी।








