
नई दिल्ली। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को अंकित शर्मा की हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने के आरोपों में दोषी ठहराया था। इस मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से छह आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था। दिल्ली पुलिस की ओर से दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
दिल्ली दंगे 23 फरवरी 2020 से शुरू हुए थे। घटना के दौरान 25 फरवरी को IB अधिकारी अंकित शर्मा अपने घर से बाहर निकले थे, लेकिन काफी समय तक वापस नहीं लौटे। परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास इलाके के नाले में पड़ा हुआ है।
अगले दिन पुलिस ने नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया। इसके बाद उनके पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने अंकित शर्मा की हत्या की।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ताहिर हुसैन के कार्यालय में एकत्र होकर वारदात की साजिश रची थी और हत्या के बाद अंकित शर्मा के शव को नाले में फेंक दिया गया था। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।







