
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 23 और व्यक्तियों को ‘नामित आतंकवादी’ घोषित किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, ये सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) से जुड़े हैं तथा आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
सरकार के मुताबिक, घोषित किए गए लोगों में 6 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जबकि 17 पाकिस्तान के रहने वाले हैं। इनमें 7 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और 10 पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में मौजूद हैं। इन नए नामों के जुड़ने के बाद केंद्र सरकार की ओर से UAPA के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
गृह मंत्रालय का कहना है कि ये व्यक्ति आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ, आतंकी हमलों की साजिश, आतंक के लिए धन जुटाने, हथियारों की आपूर्ति और आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। सूची में शामिल कुछ जैश से जुड़े आतंकियों का नाम 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां आतंकी हमले की जांच में भी सामने आया था।
UAPA, 1967 भारत का प्रमुख आतंकवाद विरोधी कानून है। वर्ष 2019 में हुए संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी संगठन के साथ-साथ किसी व्यक्ति को भी ‘आतंकवादी’ घोषित करने का अधिकार मिला। इससे पहले केवल संगठनों को प्रतिबंधित किया जा सकता था।
किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार गृह मंत्रालय के पास होता है। मंत्रालय अधिसूचना जारी कर संबंधित व्यक्ति का नाम UAPA की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) में शामिल करता है। यदि किसी व्यक्ति के आतंकवादी गतिविधियों, फंडिंग, भर्ती, हथियारों की तस्करी या आतंकी संगठनों की सहायता में शामिल होने के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो उसके खिलाफ यह कार्रवाई की जाती है।
ऐसा घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की जा सकती हैं, वित्तीय लेनदेन पर निगरानी बढ़ाई जाती है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज की जा सकती है। कानून के तहत संबंधित व्यक्ति को अपना नाम सूची से हटाने के लिए आवेदन करने और आवश्यक होने पर रिव्यू कमेटी या अदालत का रुख करने का अधिकार भी प्राप्त है।








