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दान में आए सोने-चांदी के जेवरातों में भी गड़बड़ी के आरोप, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद
राम मंदिर चढ़ावा विवाद
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Written by
Rishabh Rai

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से जुड़े कथित गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए पहलुओं की चर्चा तेज होती जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे प्रकरण को अब बेहद गंभीरता से खंगाल रहा है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसियां उस अवधि पर विशेष फोकस कर रही हैं, जब महाकुंभ के दौरान देशभर से भारी संख्या में श्रद्धालु उत्तर प्रदेश पहुंचे थे और अयोध्या में दर्शन-पूजन के लिए लंबी भीड़ देखी गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, इसी अवधि में दानपात्रों में नकदी और आभूषणों का दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गया था। भारी भीड़ और बढ़े हुए दान प्रवाह के बीच गिनती और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में कुछ तकनीकी और प्रबंधन संबंधी खामियों की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस व्यवस्था का फायदा उठाकर किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं तो नहीं की गईं।

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महाकुंभ के दौरान प्रयागराज से लेकर अयोध्या तक श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिला था। इसी भीड़ का असर दान व्यवस्था पर भी पड़ा और रिकॉर्ड के अनुसार दानपात्रों में बड़ी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के आभूषण प्राप्त हुए थे। अब जांच एजेंसियां इस पूरे लेन-देन के दस्तावेजों, गिनती रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कर रही हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि केवल नकदी ही नहीं, बल्कि दान में आए आभूषणों की सूची और उनके सुरक्षित भंडारण को लेकर भी जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या सभी आभूषणों का सही तरीके से रिकॉर्ड रखा गया था या किसी स्तर पर विसंगति हुई है। हालांकि अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।

इस मामले के सामने आने के बाद मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और दान प्रबंधन से जुड़े तंत्र पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चढ़ावे के प्रबंधन के लिए मजबूत ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।

फिलहाल SIT लगातार दस्तावेजों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी और किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।

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