
नई दिल्ली/तेहरान। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर स्पष्ट कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
जानकारी के अनुसार, इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू मेंबर वाले तीन जहाज हमलों का शिकार हुए। इनमें 10 जून को हुए एक हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार ने दूसरी बार अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने के पीछे ईरान समर्थित ड्रोन हमले की कोशिश थी, जिसे विफल कर दिया गया।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों देश किसी समझौते के पहले से कहीं अधिक करीब हैं, लेकिन अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। उन्होंने जिनेवा में 14 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि मीडिया को शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए।
अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि संभावित समझौते के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि ईरान टोल टैक्स नहीं वसूलेगा, लेकिन कुछ सेवाओं के बदले शुल्क लिया जा सकता है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनका पूर्ण नियंत्रण है और उनकी अनुमति के बिना कोई जहाज वहां से नहीं गुजर सकता। माना जा रहा है कि जल्द ही ईरान और ओमान इस मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर दुनिया की निगाहें अब अमेरिका-ईरान वार्ता के अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।









