
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को पार्टी का नया चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया। इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से नियुक्ति लागू करने का अनुरोध किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ चुका है और लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 सांसदों के बगावती रुख ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक, बागी सांसदों ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है और उन्होंने सांसद काकोली घोष दास्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुना है। काकोली घोष ने बागी सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष को भेजकर अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर मतभेद अब केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संसदीय राजनीति में भी खुलकर दिखाई देने लगे हैं।
चीफ व्हिप किसी भी राजनीतिक दल के लिए संसद में बेहद महत्वपूर्ण पद माना जाता है। उसकी जिम्मेदारी सांसदों के बीच अनुशासन बनाए रखने, पार्टी की रणनीति लागू कराने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकजुटता सुनिश्चित करने की होती है। ऐसे में कल्याण बनर्जी की नियुक्ति को पार्टी नेतृत्व द्वारा नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी के लिए संकट केवल सांसदों तक सीमित नहीं है। इससे पहले 3 जून को पार्टी के 58 विधायकों के अलग गुट बनाने की खबरों ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत कर रहे हैं। विधायकों के बाद अब सांसदों के असंतोष ने ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
दिलचस्प बात यह है कि काकोली घोष ने 27 मई को टीएमसी छोड़ने का ऐलान कर दिया था, लेकिन उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया। सोमवार को उन्होंने दावा किया था कि वे अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक हैं। काकोली ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर ममता बनर्जी के साथ दशकों पुराना रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मैं 1986 से ममता बनर्जी के साथ हूं। मैंने संघर्ष करके यह मुकाम हासिल किया है। मेरा सिर कट जाएगा, लेकिन झुकेगा नहीं।”
इस बीच टीएमसी नेताओं ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि कुछ नेताओं की वफादारी केवल सत्ता और जीत तक सीमित रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक फोन कॉल पर नैतिकता और विचारधारा को छोड़ देना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं, नए चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी ने भी अपने तेवर साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि भले ही विरोधियों के पास केंद्रीय एजेंसियों और सत्ता की ताकत हो, लेकिन उनके साथ बंगाल की जनता, पार्टी कार्यकर्ता और ‘मां, माटी, मानुष’ की भावना खड़ी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी में बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को किस तरह बाहर निकालती हैं।







