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क्यों बढ़ रहा है युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा और क्या है Lp(a) का रोल

क्यों बढ़ रहा है युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा
क्यों बढ़ रहा है युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा
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Written by
Rishabh Rai

दिल की सेहत की बात आते ही ज्यादातर लोग कोलेस्ट्रॉल के तीन आंकड़ों पर ध्यान देते हैं- एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल), एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड. नियमित हेल्थ चेकअप में भी आमतौर पर इन्हीं पैरामीटर्स की जांच की जाती है. अगर ये तीनों स्तर सामान्य आ जाएं तो लोग मान लेते हैं कि उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि कई बार एक ऐसा जोखिम भी छिपा रह जाता है जो सामान्य लिपिड प्रोफाइल में दिखाई ही नहीं देता. यह जोखिम है लाइपोप्रोटीन (a) या Lp(a), जो दिल की बीमारी और हार्ट अटैक के खतरे को काफी बढ़ा सकता है।

हाल के वर्षों में भारत में डॉक्टरों ने एक चिंताजनक ट्रेंड नोटिस किया है. कई ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जिनकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य होती है, फिर भी वे 30 से 40 साल की उम्र में हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं. इससे यह सवाल उठता है कि आखिर सामान्य रिपोर्ट के बावजूद दिल की बीमारी क्यों हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे छिपे हुए लिपिड मार्कर, खासतौर पर Lp(a), बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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क्या होता है Lp(a)?

Lp(a) दरअसल एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जैसा ही एक कण होता है, लेकिन इसकी संरचना थोड़ी अलग होती है. इसमें एलडीएल के साथ एक अतिरिक्त प्रोटीन जुड़ा होता है जिसे एपोलाइपोप्रोटीन (a) कहा जाता है. यही प्रोटीन इसे सामान्य एलडीएल से अलग बनाता है और शरीर में इसका व्यवहार भी अलग होता है।

जब शरीर में Lp(a) का स्तर ज्यादा होता है तो यह धमनियों की दीवारों में जमा होकर प्लाक बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है. प्लाक जमा होने से धमनियां संकरी हो जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित होने लगता है. इसके अलावा यह ब्लड वेसल्स में सूजन को बढ़ा सकता है और खून के थक्के बनने की संभावना भी बढ़ा देता है. यही कारण है कि ज्यादा Lp(a) स्तर दिल का दौरा, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

जेनेटिक्स से जुड़ा होता है Lp(a)

विशेषज्ञ बताते हैं कि Lp(a) का स्तर ज्यादातर जेनेटिक यानी आनुवंशिक कारणों से निर्धारित होता है. इसका मतलब है कि यदि परिवार में किसी व्यक्ति का Lp(a) स्तर अधिक है, तो अगली पीढ़ी में भी यह समस्या हो सकती है। यही वजह है कि कई बार पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले और सामान्य कोलेस्ट्रॉल वाले लोग भी अचानक हार्ट अटैक का सामना कर लेते हैं।

डाइट, एक्सरसाइज और जीवनशैली में बदलाव से सामान्य कोलेस्ट्रॉल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन Lp(a) पर इनका प्रभाव सीमित होता है. इसलिए इसे “छिपा हुआ कोलेस्ट्रॉल जोखिम” भी कहा जाता है।

भारत में क्यों बढ़ रही है समस्या?

भारत में समय से पहले दिल की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कई रिपोर्टों के अनुसार देश में होने वाली कुल मौतों का एक बड़ा हिस्सा हृदय रोगों से जुड़ा है। चिंता की बात यह है कि भारतीयों में हार्ट अटैक पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 से 15 साल पहले देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, धूम्रपान, अनियमित खानपान और कम शारीरिक गतिविधि जैसे कारक शामिल हैं. इसके साथ ही Lp(a) जैसे छिपे हुए लिपिड मार्कर भी इस जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।

सामान्य टेस्ट में नहीं होता शामिल

दिलचस्प बात यह है कि सामान्य लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में Lp(a) की जांच नहीं की जाती. यही वजह है कि कई लोगों की रिपोर्ट सामान्य आती है, लेकिन उनके शरीर में यह जोखिम मौजूद रहता है।

कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के मामले रहे हों, उन्हें Lp(a) की जांच जरूर करवानी चाहिए। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दिल से जुड़ी समस्या हो रही है या सामान्य इलाज के बावजूद जोखिम बना हुआ है, तो यह टेस्ट काफी मददगार साबित हो सकता है।

किन लोगों को करवाना चाहिए यह टेस्ट?

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों को Lp(a) की जांच खासतौर पर करवानी चाहिए। जैसे—

जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास रहा हो

जिनका कोलेस्ट्रॉल सामान्य होने के बावजूद दिल की बीमारी का खतरा बना हुआ हो

जिन्हें पहले से हृदय रोग या ब्लॉकेज की समस्या हो

जिन लोगों को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है

इन लोगों में Lp(a) स्तर की जांच से भविष्य के जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

जोखिम कम करने के उपाय

हालांकि Lp(a) मुख्य रूप से जेनेटिक्स से जुड़ा होता है, फिर भी हृदय रोग के कुल जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान से बचें और वजन नियंत्रित रखें।

इसके अलावा ब्लड प्रेशर, शुगर और सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है. कई मामलों में डॉक्टर विशेष दवाओं या अन्य उपचार विकल्पों की भी सलाह दे सकते हैं ताकि हृदय रोग का जोखिम कम किया जा सके।

जागरूकता है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि Lp(a) के बारे में जागरूकता अभी भी काफी कम है. बहुत से लोग इसके बारे में जानते ही नहीं हैं और सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट को देखकर पूरी तरह निश्चिंत हो जाते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि लोग दिल की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जांच भी करवाएं. सही समय पर जोखिम की पहचान हो जाए तो कई गंभीर हृदय रोगों और हार्ट अटैक जैसी स्थितियों से बचाव संभव हो सकता है।

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