
नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में इंडिया ब्लॉक के सांसदों और नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन से पहले पुलिस अधिकारियों ने विपक्षी नेताओं और सांसदों को समझाने की कोशिश की। पुलिस की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। ऐसे में बिना अनुमति के किसी तरह के प्रदर्शन या मार्च की इजाजत नहीं है। पुलिस ने नेताओं से शांतिपूर्वक जगह खाली करने की अपील की।
दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने कहा कि पुलिस को जानकारी मिली थी कि सांसद और उनके समर्थक तीन बसों में जंतर-मंतर की ओर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रदर्शन में सांसद शामिल हैं, इसलिए पुलिस उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करेगी और सांसदों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पहले उनसे खुद जगह खाली करने का अनुरोध करेगी।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर आगे बढ़ने की कोशिश की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सांसदों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक के सांसदों का कहना है कि पुलिस ने उनकी बस रोक दी है और उन्हें जंतर-मंतर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रियंका गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा, “क्या यही तरीका है?” उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की कार्रवाई पर सवाल उठाया और कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखा जा सकता है कि किस तरह विपक्षी सांसदों को रोका जा रहा है।
सागर रत्ना में विपक्षी सांसदों की बैठक
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में करीब डेढ़ घंटे तक बैठक और लंच किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों को लंच के लिए आमंत्रित किया था। माना जा रहा है कि इस दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
विपक्षी दल लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है। इसी मांग को लेकर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन और मार्च का रास्ता अपनाया है।
एक दिन पहले भी निकाला था मार्च
इससे एक दिन पहले इंडिया ब्लॉक के 200 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। हालांकि पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने आकाशवाणी परिसर में करीब आठ घंटे तक धरना दिया था।
हालांकि, आकाशवाणी परिसर में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। वहीं, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रदर्शन या मार्च की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जंतर-मंतर पर हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच टकराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान लागू कानूनी प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।
फिलहाल, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का आंदोलन जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।









