Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

मोदी-पुतिन वार्ता: रक्षा से ऊर्जा तक, ब्रिक्स से पहले रिश्तों की नई दिशा तय करने की तैयारी

भारत-रूस रक्षा डील पर दुनिया की नजर!
भारत-रूस रक्षा डील पर दुनिया की नजर!
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक राजनीति में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारत-रूस संबंधों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत और व्यावहारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह रिश्ते जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत में मददगार हैं।

मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा सहयोग सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकता है। रूस ने भारतीय वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर की पेशकश फिर से रखी है। प्रस्ताव में भारत में विमान की असेंबली और स्थानीय उत्पादन के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की बात शामिल है। भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की संख्या को लेकर लंबे समय से चिंता रही है। ऐसे में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल करना भारत की वायु शक्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Advertisement Box

रक्षा क्षेत्र में Su-57 के अलावा अमेठी की AK-203 राइफल परियोजना और ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा संभव है। भारत की प्राथमिकता अब केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय उत्पादन और रखरखाव की क्षमता विकसित करने पर भी है। यही वजह है कि रूस के साथ होने वाली बातचीत में ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता का मुद्दा अहम रहेगा।

परमाणु ऊर्जा और तेल पर भी नजर

ऊर्जा सहयोग भी बैठक के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रख सकता है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में रूसी तकनीक से रिएक्टर परियोजनाओं के बाद दोनों देश भारत में नए परमाणु संयंत्रों की संभावनाओं पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उच्च क्षमता वाले VVER रिएक्टरों के साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।

रूसी कच्चे तेल का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहा है। नई दिल्ली और मॉस्को के बीच बातचीत में तेल व्यापार के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, शिपिंग और बीमा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर चर्चा हो सकती है। भारत के लिए चुनौती यह है कि उसे सस्ती और पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ पश्चिमी देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों का संतुलन भी बनाए रखना है।

डॉलर से दूरी की कोशिश

भारत-रूस व्यापार में भुगतान व्यवस्था लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दोनों देश राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं। रूस की भुगतान प्रणाली और भारत की डिजिटल भुगतान क्षमताओं के बीच संपर्क बढ़ाने से द्विपक्षीय व्यापार को पश्चिमी वित्तीय प्रणाली पर निर्भरता से कुछ हद तक मुक्त करने की कोशिश की जा सकती है।

भारतीय रुपये में जमा व्यापारिक रकम के इस्तेमाल को लेकर भी रास्ते तलाशे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य व्यापार असंतुलन कम करना और भारतीय बाजार में रूसी धन के निवेश की संभावनाएं बढ़ाना हो सकता है। ब्रिक्स के व्यापक ढांचे में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान तंत्र पर चर्चा इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

कनेक्टिविटी बनेगी रणनीतिक हथियार

भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए परिवहन गलियारों पर भी विशेष जोर है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए भारत को ईरान और रूस से जोड़ने की योजना लंबे समय से दोनों देशों की प्राथमिकता रही है। रश्त-अस्तारा रेल परियोजना इसके लिए महत्वपूर्ण कड़ी है।

इसी तरह चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा भारत और रूस के बीच माल परिवहन का समय घटाने की क्षमता रखता है। आर्कटिक क्षेत्र में रूस द्वारा नॉर्दर्न सी रूट को विकसित किए जाने से भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर भी पैदा हो सकते हैं। जहाज निर्माण, बंदरगाह और आर्कटिक लॉजिस्टिक्स में सहयोग भविष्य में भारत-रूस आर्थिक रिश्तों का नया क्षेत्र बन सकता है।

यूक्रेन युद्ध पर भी होगी बातचीत

बैठक का सबसे संवेदनशील मुद्दा रूस-यूक्रेन संघर्ष हो सकता है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। मोदी पुतिन के साथ बातचीत में शांति प्रक्रिया के लिए भारत की भूमिका और ग्लोबल साउथ पर युद्ध के प्रभावों को रेखांकित कर सकते हैं। खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा जैसे मुद्दे भी भारत की चिंता में शामिल रहेंगे।

भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बनाती है। विस्तारित ब्रिक्स में 11 सदस्य देशों की मौजूदगी के बीच नई दिल्ली वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मोदी-पुतिन बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ब्रिक्स के भीतर भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत देगी।

2014 के बाद मोदी और पुतिन की यह 19वीं आमने-सामने की मुलाकात बताई जा रही है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से कायम व्यक्तिगत संपर्क और रणनीतिक विश्वास भारत-रूस संबंधों की महत्वपूर्ण ताकत हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली यह वार्ता रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक कूटनीति—चारों मोर्चों पर आने वाले वर्षों के लिए रिश्तों की दिशा तय कर सकती है।

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

और भी पढ़ें

WhatsApp