
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की 7.8 प्रतिशत की GDP विकास दर हासिल करने पर देशवासियों को बधाई दी है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि देशवासियों की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक ताकत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत को विकास की इस गति को बनाए रखते हुए आने वाले समय में इसे और तेज करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। देश के भीतर कुछ लोगों द्वारा निराशा फैलाने और ‘झूठ की गूंज’ के सहारे माहौल खराब करने की कोशिशों का जिक्र करते हुए उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है और अब जरूरत इस रफ्तार को बनाए रखने की है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील भी दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सोने की जरूरत नहीं है तो उसकी खरीदारी नहीं करनी चाहिए। इससे पहले 10 मई को भी प्रधानमंत्री देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील कर चुके हैं। पीएम की अपील के पीछे देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा की बचत से जुड़ा आर्थिक पक्ष भी है। भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99 प्रतिशत सोना विदेशों से खरीदता है। वर्ष 2025-26 में सोने के आयात पर करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए।
प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश में गैर-जरूरी यात्राओं और विदेशों में शादी करने से भी बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि देशवासियों को ‘मेक इन इंडिया’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि जितना अधिक स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा, भारत उतनी ही मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।
सोने के आयात का सीधा संबंध विदेशी मुद्रा से है। भारत जब विदेश से सोना खरीदता है तो इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में सोने का आयात बढ़ने पर डॉलर की मांग भी बढ़ती है। वहीं, सोने का आयात कम होने पर विदेशी मुद्रा की बचत होती है और डॉलर की मांग पर दबाव कम हो सकता है। इसका सकारात्मक असर रुपये की स्थिति पर पड़ सकता है।
रुपये की मजबूती का असर आयात लागत पर भी पड़ता है। भारत कच्चे तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं के लिए आयात पर निर्भर है। रुपया मजबूत होने पर इन वस्तुओं की खरीद के लिए कम रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे आयात लागत कम करने और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पिछले कारोबारी साल में भारत ने मात्रा के लिहाज से करीब 4.76 प्रतिशत कम सोना खरीदा, लेकिन इसके बावजूद सोने के आयात बिल में करीब 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेज वृद्धि रही। यानी सोने की मात्रा कम खरीदने के बावजूद उसकी ऊंची कीमत के कारण भारत को ज्यादा भुगतान करना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता को भारत के भविष्य से भी जोड़ा। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश को इसी दिशा में लगातार आगे बढ़ना होगा।
पीएम मोदी का संदेश ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों के जरिए युवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। राहुल अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कार्यक्रम कर चुके हैं। इन कार्यक्रमों में उन्होंने पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी, महंगी शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए हैं।
प्रधानमंत्री का जोर जहां आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने पर है, वहीं वे देशवासियों की भागीदारी को भी अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर, गैर-जरूरी आयात को कम करके और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।









