
शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के दौरान किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में वैश्विक राजनीति से जुड़े कई अहम घटनाक्रम देखने को मिले। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सदस्य देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की। दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। इसी दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शेयर की गई एक ग्रुप फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद पैदा हो गया।
SCO समिट से जुड़ी ग्रुप तस्वीर इस विवाद का केंद्र बनी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से X पर शेयर की गई तस्वीर में केवल छह नेता नजर आए। जबकि कार्यक्रम के दौरान ली गई मूल तस्वीर में करीब 12 नेता मौजूद थे। आरोप लगा कि तस्वीर को एडिट कर कुछ नेताओं को हटा दिया गया और इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।
मूल तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के नेता एक मंच पर खड़े दिखाई दे रहे थे। लेकिन पाकिस्तान PMO की ओर से जारी तस्वीर में मोदी के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत छह नेताओं को हटा दिया गया था। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि एक आधिकारिक अकाउंट से ऐसी तस्वीर क्यों साझा की गई।
इस मामले ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ा क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय ने SCO समिट की ग्रुप फोटो अलग से शेयर की, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मौजूद थे। इसके लगभग चार घंटे बाद शहबाज शरीफ ने भी SCO की तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आए। इससे पाकिस्तान PMO की पहले वाली पोस्ट को लेकर उठे सवाल और ज्यादा चर्चा में आ गए।
SCO बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक और मुद्दा सिंधु जल संधि रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि पानी को राजनीतिक दबाव बनाने या हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साझा जल संसाधनों से संबंधित समझौतों को सम्मान देने की आवश्यकता बताई।
शहबाज शरीफ का यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में आया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि साझा जल संसाधनों से जुड़े समझौतों को किसी देश की सुविधा के अनुसार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों का संवेदनशील मुद्दा रहा है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO मंच से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। मोदी ने कहा कि आतंकवाद को केवल उसके हमलों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। आतंकवाद के पीछे मौजूद पूरा नेटवर्क खत्म करना जरूरी है। इसमें आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, उनकी भर्ती, प्रशिक्षण और उन्हें मिलने वाले सुरक्षित ठिकाने सभी शामिल हैं।
मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। किसी एक देश के लिए आतंकवाद गलत और दूसरे के लिए सही नहीं हो सकता। सभी देशों को आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपनाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। देशों के बीच विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का प्रयास होना चाहिए। उनके मुताबिक पश्चिम एशिया में किसी संघर्ष का प्रभाव केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
मोदी ने SCO की भूमिका को केवल राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह संगठन विभिन्न देशों की सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का मंच भी है। ऐसे मंच देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और आपसी समझ मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अचानक हुई मुलाकात ने भी खासा ध्यान आकर्षित किया। दोनों नेताओं की अलग से द्विपक्षीय बैठक पहले से निर्धारित नहीं थी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान दोनों आमने-सामने आए। दोनों ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी दोनों नेताओं के साथ नजर आए।
पुतिन ने अपने संबोधन में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के 87 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी घटनाओं से बचना चाहिए, जो नए युद्ध और संघर्ष को जन्म दे सकती हैं। पुतिन ने वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने और नए टकरावों को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।
बिश्केक में हुआ SCO समिट इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहा कि यहां आतंकवाद, क्षेत्रीय संघर्ष, पानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे कई संवेदनशील मुद्दे एक साथ सामने आए। मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश, शहबाज शरीफ का सिंधु जल संधि पर बयान, मोदी-जिनपिंग की अचानक मुलाकात और पाकिस्तान PMO की ग्रुप फोटो को लेकर विवाद- इन सभी घटनाओं ने समिट को सुर्खियों में बनाए रखा।








