
नई दिल्ली। संसद का 25 दिनों तक चला मॉनसून सत्र गुरुवार को विपक्ष के हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ समाप्त हो गया। सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में कई मुद्दों को लेकर लगातार गतिरोध देखने को मिला। हालांकि, कामकाज के लिहाज से केंद्र सरकार ने सत्र को सफल बताया है। संसद का सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया।
किरेन रिजिजू ने कहा कि मॉनसून सत्र को दो नजरिए से देखा जाना चाहिए। बिजनेस के लिहाज से यह सत्र काफी अच्छा रहा, जबकि चर्चा और बहस के लिहाज से सरकार इससे संतुष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित किए गए। रिजिजू के मुताबिक, सरकार ने सदन में कामकाज को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश की और विपक्ष को चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर देने की कोशिश की गई।
केंद्रीय मंत्री ने संसद की उत्पादकता का आंकड़ा भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में निर्धारित समय की तुलना में केवल 19 प्रतिशत उत्पादकता रही, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता 39 प्रतिशत रही। रिजिजू ने कहा कि राज्यसभा में भी कई मौकों पर विपक्षी दलों ने हंगामा किया और वॉकआउट किया। वहीं, लोकसभा में सिर्फ एक विधेयक पर चर्चा हो सकी। उन्होंने बताया कि नकल रोकने से संबंधित विधेयक पर चर्चा हुई, लेकिन इसके अलावा दूसरे विधेयकों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो पाई।
रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संसद में उनका करीब तीन दशक का अनुभव है, लेकिन उन्होंने पहली बार ऐसा देखा है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा है। उन्होंने कहा कि पहले अक्सर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर मतभेद होते थे, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। उनके मुताबिक, विपक्ष का संसद में चर्चा के बजाय हंगामा करने पर ज्यादा जोर रहा।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ सांसदों के लिए संसद में नारे लगाना और हाथों में कार्ड लेकर हंगामा करना ही मुख्य काम रह गया है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के नए सांसदों के लिए उन्हें चिंता होती है, क्योंकि अगर संसद में चर्चा नहीं होगी तो नए सांसद संसदीय कार्यप्रणाली को सीखेंगे कैसे।
उन्होंने कहा कि संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा और कानून बनाने का मंच है। ऐसे में सदन की कार्यवाही बाधित होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। रिजिजू ने कहा कि सरकार आगे भी संसद में चर्चा और बहस के लिए तैयार रहेगी।
मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाया। सत्र के आखिरी दिन भी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। सरकार जहां 12 विधेयकों के पारित होने को अपनी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर उसे पर्याप्त चर्चा का मौका नहीं दिया गया।
इस तरह 25 दिनों का मॉनसून सत्र राजनीतिक टकराव और हंगामे के बीच समाप्त हुआ। सरकार ने जहां इसे कामकाज की दृष्टि से सफल बताया, वहीं कम उत्पादकता और सीमित चर्चा को लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की।








