
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन में अनुशासन और एकजुटता को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मायावती ने स्पष्ट कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया, इसलिए अब उन्हें भविष्य में भी पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा।
यह पिछले डेढ़ वर्ष में दूसरा मौका है, जब अशोक सिद्धार्थ को बसपा से निकाला गया है। इससे पहले 12 फरवरी 2025 को भी उन्हें संगठन में गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर किया गया था। हालांकि, करीब छह महीने बाद सितंबर 2025 में उनकी वापसी करा दी गई थी। लेकिन इस बार मायावती ने साफ कर दिया है कि उनका निष्कासन स्थायी है।
अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी थी। शनिवार को ही मायावती ने उनसे इन सभी राज्यों का प्रभार वापस ले लिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी जा सकती है। मायावती ने आरोप लगाया कि ऐसी खबरें जानबूझकर फैलाकर कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने और संगठन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का फैसला लिया गया।
इसी कार्रवाई के तहत पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी तथा पार्टी के कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को भी संगठन से बाहर कर दिया गया है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह या साजिश से सावधान रहें और पार्टी के आधिकारिक निर्देशों पर ही भरोसा करें।
वहीं अशोक सिद्धार्थ और रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से बाहर करने के बाद राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को दोबारा पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है। मायावती ने निर्देश दिया है कि आगामी पंजाब विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
संगठन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के प्रभारी राजाराम को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। अब वे दिल्ली, केरल, गुजरात और कर्नाटक में भी पार्टी संगठन का कामकाज देखेंगे। वहीं, अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह से भी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।
मायावती ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के ऐसे पदाधिकारी, जो पहले से दूसरे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश में कोई अतिरिक्त दायित्व नहीं दिया जाएगा। उनका कहना है कि संगठन में स्पष्ट जवाबदेही और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह नीति जरूरी है।
बसपा प्रमुख ने अपने संदेश में कहा कि कुछ लोग जानबूझकर संगठन में भ्रम फैलाने और गुटबाजी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे तत्व बसपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के अभियान को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने और केवल पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
गौरतलब है कि 2025 में भी गुटबाजी और संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह को पार्टी से बाहर किया गया था। उसी दौर में आकाश आनंद को भी पहले पद से हटाया गया और बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि, माफी मांगने के बाद अप्रैल 2025 में आकाश आनंद की वापसी हुई, जबकि सितंबर 2025 में अशोक सिद्धार्थ को भी फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया था। लेकिन इस बार मायावती के फैसले से साफ संकेत मिला है कि संगठनात्मक अनुशासन के मुद्दे पर बसपा नेतृत्व किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है।







