
लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के करीब 50 मिनट के भाषण ने सदन का माहौल पूरी तरह राजनीतिक बना दिया। राहुल गांधी ने सरकार पर पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद करने, शिक्षा व्यवस्था को आरएसएस के प्रभाव में चलाने और छात्र आंदोलनों को दबाने के आरोप लगाए। वहीं उनके कुछ बयानों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। लगातार व्यवधान और हंगामे के बीच आखिरकार लोकसभा ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि उन्होंने कई छात्रों से मुलाकात की है और उनकी पीड़ा को समझा है। इसी दौरान उन्होंने 18 वर्षीय छात्रा ‘लवली’ से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इन शब्दों पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कई बार खड़े हुए और इसे असंसदीय भाषा बताते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी बार-बार हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन की गरिमा के अनुरूप भाषा का प्रयोग करना चाहिए। बाद में अध्यक्ष ने इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से आग्रह किया कि ऐसे शब्द रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रहने चाहिए।
गृह मंत्री पर आरोप से बढ़ा विवाद
भाषण के दौरान सबसे बड़ा विवाद उस समय हुआ जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोली और पैलेट गन चलाने की अनुमति दी थी। इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। किरेन रिजिजू ने इसे बेहद गंभीर और निराधार आरोप बताते हुए कहा कि बिना किसी तथ्य के इस तरह का आरोप लगाना नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से तुरंत माफी मांगने की मांग की।
राहुल गांधी अपने आरोप पर कायम रहे और कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और “राहुल गांधी को बोलने दो” के नारे लगाए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए कि छात्रों के साथ आखिर क्या हुआ।
इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा कि जांच की मांग अलग बात है, लेकिन सीधे गृह मंत्री पर गोली चलाने का आदेश देने का आरोप लगाना पूरी तरह गलत और तथ्यहीन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सदन में लगाए गए इस आरोप के लिए माफी मांगनी चाहिए।
युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था आरएसएस के प्रभाव में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल दिखावा था और इससे छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
राहुल ने कहा कि देशभर में छात्र अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों में नफरत नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बचाने की चिंता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा नेता अपने बच्चों से पूछेंगे तो उन्हें भी छात्रों के संघर्ष का समर्थन मिलेगा।
सत्ता पक्ष का पलटवार
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का बचाव किया। जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में गोली चलाने का आदेश कोई केंद्रीय मंत्री नहीं देता, बल्कि संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला प्रशासन निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चली थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में तथ्यात्मक और जिम्मेदार बयान देने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना प्रमाण के गंभीर आरोप लगाकर सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से लाया गया यह विधेयक अंततः हंगामे और तीखी राजनीतिक नोकझोंक के बीच लोकसभा से पारित हो गया। हालांकि बहस के दौरान विधेयक से अधिक चर्चा राहुल गांधी के आरोपों, सत्ता पक्ष के विरोध और संसद में हुई तीखी बहस पर केंद्रित रही। विपक्ष ने इसे युवाओं की आवाज उठाने का प्रयास बताया, जबकि सरकार ने विपक्ष पर तथ्यों के बिना राजनीतिक आरोप लगाने का आरोप लगाया।






