
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए यूनिफाइड मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन-2026 तैयार
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के समक्ष प्रस्तुत हुआ यूनिफाइड मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन-2026
निवेश, औद्योगिक विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, भवन निर्माण नियम होंगे सरल और आधुनिक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से आवास एवं औद्योगिक विकास विभाग ने यूनिफाइड मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन-2026 तैयार कर लिया है। बुधवार को पिकप भवन में आयोजित बैठक में इस मसौदे को औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बैठक में प्रस्ताव के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हुई और मंत्री ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

यह मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA), गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA), उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) तथा अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए तैयार किया गया है। इसे जल्द ही मंत्रिपरिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं। यूनिफाइड मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन-2026 विकास को नियंत्रित करने के बजाय उसे प्रोत्साहित करने वाला प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को सभी व्यावहारिक समस्याओं और विसंगतियों को दूर करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों, उद्यमियों और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नया रेगुलेशन प्रदेश में निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना विकास को नई दिशा देगा तथा उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य प्रावधान
- भवन निर्माण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
- भूमि के बेहतर एवं अधिकतम उपयोग तथा वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया गया है।
- विभिन्न श्रेणियों में एफएआर (Floor Area Ratio) बढ़ाया गया है।
- 45 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर एफएआर की अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
- छोटे आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल की व्यवस्था की गई है।
- ऑनलाइन डीम्ड एनओसी प्रणाली विकसित करने का प्रावधान किया गया है।
- पुराने भवनों में कंपाउंडिंग, अतिरिक्त निर्माण और परिवर्तन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।
औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान
- फ्लैटेड फैक्ट्री, एमएसएमई, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर के लिए अलग प्रावधान।
- औद्योगिक भूखंडों पर श्रमिकों के लिए डॉर्मिटरी की सुविधा।
- डेटा सेंटर के लिए अतिरिक्त एफएआर।
- औद्योगिक क्षेत्रों में स्टिल्ट एवं पोडियम पार्किंग की अनुमति।
आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र
- ग्रुप हाउसिंग के लिए न्यूनतम भूखंड आकार 2000 वर्गमीटर।
- 1500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाले ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में पोडियम पार्किंग की अनुमति।
- प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 के अनुरूप किफायती आवास के मानकों को शामिल किया गया है।
- 20 कमरों तक के होटलों के लिए न्यूनतम भूखंड आकार की शर्तों को सरल बनाया गया है।
- आईटी/आईटीईएस, कार्यालयों और सर्विस अपार्टमेंट के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र
- डायग्नोस्टिक सेंटर, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और अस्पतालों के लिए अलग मानक।
- एम्बुलेंस पार्किंग की व्यवस्था।
- नर्सरी से विश्वविद्यालय स्तर तक शैक्षणिक संस्थानों के लिए भूखंड आकार के मानकों का युक्तिकरण।
- स्कूल बस पार्किंग और पिक-अप/ड्रॉप-ऑफ जोन का प्रावधान।
मिक्स्ड यूज़ और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट
30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज़) विकास को अनुमति दी जाएगी। इससे आवासीय, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्रों का संतुलित विकास होगा तथा आधुनिक शहरों के निर्माण को गति मिलेगी।
बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।







