
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रह्लाद जोशी को यह नई जिम्मेदारी दी।
प्रह्लाद जोशी फिलहाल केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी कार्यभार संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें सरकार के भरोसेमंद नेताओं में माना जाता है।
कर्नाटक के विजयपुरा में 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहे। उन्होंने 1995 में भाजपा संगठन के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और धारवाड़ जिला अध्यक्ष तथा जिला महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
साल 2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी तब से लगातार पांच बार लोकसभा पहुंचे हैं। संगठन और संसद दोनों में उनके अनुभव को देखते हुए वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया और संसदीय कार्य मंत्री बनाया। इसके बाद उन्होंने कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ उनके सामने देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों से निपटने की चुनौती होगी। नीट पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय की यह जिम्मेदारी राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।







