
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका ने ईरान पर कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के तीसरे चरण को पूरा कर लिया गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक युद्धपोतों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में ईरान के 300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। इनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, हथियारों के भंडार और तटीय निगरानी केंद्र शामिल हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन अभियानों का मकसद ईरान की समुद्री हमले की क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका का दावा है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद होर्मुज से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, मई की शुरुआत से अब तक उसने सैकड़ों व्यापारिक जहाजों और बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है।
हालांकि, क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर तेल कीमतों, वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी हुई है।









