
नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के औद्योगिक विकास का नया केंद्र बन रहा है और जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण जंगलराज की पहचान रखता था, वही आज निवेश, उद्योग और रोजगार के कारण “मंगलराज” का प्रतीक बन चुका है।
मुख्यमंत्री शनिवार को अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर नोएडा के सेक्टर-10 स्थित अंबर इंटरप्राइजेज और एस्केंट सर्किट की इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर क्षेत्र में 6,785 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है, जिसमें दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और कोरिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी रत्ना का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जलमार्ग से कोरिया पहुंची थीं और आज भी वहां उनका सम्मान किया जाता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि भारत को उन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना है, जहां पहले आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। अब उत्तर प्रदेश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और सेमीकंडक्टर न केवल देश की जरूरतें पूरी करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निर्यात किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार किया है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम, निवेश प्रोत्साहन और पारदर्शी नीतियों के जरिए उद्योगों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर आज देश का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है, जहां भारत में बनने वाले लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन का उत्पादन होता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रहे नए निवेश से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और उत्तर प्रदेश देश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।







