
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला प्रथम दृष्टया असंवैधानिक है। ऐसे में अब सरकार को जनता के सामने जवाब देना चाहिए कि इस तरह का निर्णय लेने की जिम्मेदारी किसकी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के आदेश के बाद प्रदेश के हजारों ग्राम प्रधानों को यह उम्मीद थी कि वे प्रशासक के रूप में विकास कार्य जारी रख सकेंगे। कई प्रधानों ने अपने क्षेत्रों में नए कार्यों की योजना बनाई और जनता से वादे भी किए। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनके सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
सपा अध्यक्ष ने वित्तीय पहलू पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में विकास कार्यों पर खर्च हुआ है, तो अब उन खर्चों की वैधता और भुगतान को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है। इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज और ग्रामीण विकास पर असर पड़ने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। तब तक इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस जारी रहने की संभावना है।







