
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में दो मंजिला इमारत में लगी भीषण आग के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच टीम इमारत से महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बैगों में भरकर अपने साथ ले गई।
सरकार की ओर से गठित एसआईटी में आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार और आईएएस अधिकारी अमृत अभिजात शामिल हैं। टीम आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक जिम्मेदारी की पड़ताल कर रही है। वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञ भी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आग किस परिस्थिति में इतनी तेजी से फैली।
हादसे में जान गंवाने वाले 15 लोगों के शवों का करीब सात घंटे तक पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसके बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमॉर्टम हाउस में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब पश्चिम बंगाल की रहने वाली 30 वर्षीय अनामिका का शव देखकर उनकी मां बेहोश हो गईं। इस घटना ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में थी। वर्ष 2016 में इस भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन बाद में वह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि भवन मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है और जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।
यह इमारत रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के संचालक वीरेंद्र शुक्ला की बताई जा रही है। पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करते हुए वीरेंद्र शुक्ला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं एलडीए के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और 14 अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में फायर सेफ्टी मानकों को लेकर व्यापक अभियान शुरू किया गया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 48 कोचिंग संस्थानों और तीन होटलों को सील किया जा चुका है, जहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए। अलीगंज स्थित जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसके बेसमेंट, ग्राउंड और प्रथम तल पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित थे, जबकि दूसरे तल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की लाइब्रेरी और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ संचालित हो रहा था।
इस हादसे ने एक बार फिर अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें एसआईटी की जांच रिपोर्ट और दोषियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।








