
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने एसआईटी को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
हादसे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल भी जाना और उनके बेहतर उपचार के निर्देश दिए।
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी थी, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, दो महीने से भी कम समय में यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में कार्रवाई रोकी गई थी।
सरकार ने लापरवाही बरतने के आरोप में बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।
यह हादसा एक बार फिर अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।







