
लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर में कथित दान और वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर योगी सरकार और मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) पर निशाना साधा है। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सबूतों को ठिकाने लगाए जाने की आशंका भी जताई है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “SIT ध्यान रखे। कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद राम मंदिर दान विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
दरअसल, अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। यह जांच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आग्रह पर शुरू की गई। तीन सदस्यीय एसआईटी अब तक ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच के दौरान भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी इन रिकॉर्ड से संबंधित सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।








