
नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की सातवीं बैठक सोमवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई। करीब दो साल बाद हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में 25 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। वहीं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के सभी दल पांच प्रमुख मुद्दों पर एकमत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा में देश के युवाओं के साथ अन्याय हुआ है और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। खड़गे ने कहा कि शिक्षा मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। खड़गे ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्षी दल इस मामले और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखेंगे। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की गई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि INDIA ब्लॉक अब नियमित अंतराल पर बैठकें करेगा। गठबंधन हर दो महीने में बैठक आयोजित करेगा और संसद के मानसून सत्र के दौरान भी समन्वय बनाए रखेगा। अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।
खड़गे ने आरोप लगाया कि संविधान पर लगातार हमले हो रहे हैं और केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक माहौल कमजोर पड़ रहा है, निवेश की गति संतोषजनक नहीं है और इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।
बैठक में 23 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा कपिल सिब्बल भी शामिल हुए। नेताओं ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों का संयुक्त रूप से मुकाबला करने और विपक्षी एकता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगामी चुनावी रणनीति और विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।









