
देश की सियासत एक बार फिर नीट (NEET) परीक्षा को लेकर गरमा गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने साल 2024 और 2026 की नीट परीक्षाओं की तुलना करते हुए सरकार की नीतियों और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि साल 2024 में नीट का पेपर लीक हुआ था। उस समय परीक्षा रद्द नहीं की गई और न ही संबंधित मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया। केवल खानापूर्ति के लिए सीबीआई जांच और एक कमेटी का गठन किया गया। अब साल 2026 में भी नीट का पेपर दोबारा लीक हो गया। इस बार परीक्षा तो रद्द कर दी गई, लेकिन मंत्री ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस बार भी सीबीआई जांच केवल दिखावा बनकर रह गई है और नई कमेटी बनाकर समय गंवाया जाएगा।
नेता विपक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन गंभीर सवाल पूछे हैं। पहला, देश बार-बार नीट पेपर लीक होने के मामले में सीधे जवाब चाहता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। दूसरा, मोदी जी हर साल छात्रों से “परीक्षा पे चर्चा” तो करते हैं, लेकिन नीट जैसी संवेदनशील परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होने के मामले पर चुप क्यों रहते हैं। तीसरा, बार-बार असफल साबित हो रहे देश के शिक्षा मंत्री को अब तक उनके पद से क्यों नहीं हटाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीट परीक्षा जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लगातार पेपर लीक होना न केवल छात्रों के भविष्य पर असर डालता है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। विपक्ष के हमले से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है, और छात्रों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा तेज हो गई है।
सामाजिक मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हुआ है। छात्र और अभिभावक दोनों ही पेपर लीक की घटनाओं से चिंतित हैं। वे सरकार से तत्काल समाधान और कड़े कदम की उम्मीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो न केवल छात्रों का विश्वास प्रणाली से उठ जाएगा, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।






