
40 दिन के महायुद्ध को रोकना इतना आसान नहीं था। ईस्टर के मौके पर जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में भाषण दे रहे थे, तभी ईरान की ओर से पहला सकारात्मक संदेश आया। मोजतबा खामेनेई के वार्ताकारों ने डील को आगे बढ़ाने की बात कही। एक्सिऑस की रिपोर्ट के मुताबिक यह खबर इजरायली अधिकारी, क्षेत्रीय सूत्र और अन्य जानकारों ने अलग-अलग तरीकों से दी।
पेंटागन और अमेरिकी सेना ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले की तैयारी में जुटी थी। खाड़ी देश ईरानी जवाबी हमले के लिए तैयार हो रहे थे, और कुछ ईरानी नागरिक सुरक्षा के लिए घर छोड़ रहे थे।
मध्यस्थों की भूमिका:
पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने अमेरिकी और ईरानी पक्षों के बीच वार्ता को सुचारू बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ईरानी विदेश मंत्री अब्दुल्ला अराघची ने नए ड्राफ्ट तैयार किए। चीन ने भी ईरान को ‘ऑफ-रैंप’ लेने की सलाह दी।
अंतिम फैसला और सीजफायर:
मंगलवार सुबह ट्रंप ने अपनी सबसे भयावह धमकी दी – “आज रात एक सभ्यता मर जाएगी।” बावजूद इसके, वार्ता आगे बढ़ी और दोपहर तक दोनों पक्ष दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमत दिखे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता के बाद ट्रंप ने सीजफायर का पालन सुनिश्चित किया। इसके 15 मिनट बाद अमेरिकी सेना को स्टैंड डाउन का आदेश मिला।
ईरानी विदेश मंत्री ने घोषणा की कि ईरान सीजफायर का पालन करेगा और हॉर्मुज की खाड़ी सुरक्षा के लिए खोली जाएगी। अमेरिका ने शांति वार्ता में परमाणु सामग्री छोड़ने, संवर्धन रोकने और बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को खत्म करने की गारंटी मांगी है। उप राष्ट्रपति जेडी वांस अगले दौर की वार्ता का नेतृत्व करेंगे।









