
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र एनडीए ने शुक्रवार को अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में जारी इस संकल्प पत्र में युवाओं और छात्रों को ध्यान में रखकर कई बड़े वादे किए गए हैं। एनडीए ने घोषणा की है कि अगर उनकी सरकार फिर सत्ता में आती है, तो बिहार में केजी से लेकर पीजी तक की शिक्षा पूरी तरह निशुल्क होगी। साथ ही एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा भी किया गया है। एनडीए के संकल्प पत्र में औद्योगिक निवेश, कृषि विकास और महिला सशक्तिकरण पर भी ज़ोर दिया गया है। घोषणा पत्र के मुताबिक, राज्य में नए औद्योगिक ज़ोन बनाकर निवेश बढ़ाने की योजना है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें। वहीं महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं को और मज़बूत करने की बात कही गई है।
हालांकि विपक्ष ने एनडीए के इस संकल्प पत्र पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इसे “26 सेकेंड में जारी झूठा दस्तावेज़” बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “एनडीए ने सिर्फ़ चुनावी वादों का ढेर लगाया है, जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।” पार्टी का आरोप है कि बीते 18 वर्षों में नीतीश कुमार और भाजपा सरकार ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर राज्य को पीछे ही धकेला है।
राजद ने भी एनडीए के वादों को अविश्वसनीय करार देते हुए कहा कि जनता अब “वादों के नहीं, काम के आधार पर वोट देगी।”चुनावी माहौल में एनडीए का यह मेनिफेस्टो जहां युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे जनता को भ्रमित करने का नया प्रयास बता रहा है।







