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राष्ट्रपति तो लाम की पहली राजकीय यात्रा से और गहरे होंगे भारत-वियतनाम संबंध

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Written by
Harsh Rathore

नई दिल्ली। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम भारत की अपनी पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने उनका स्वागत किया।

यात्रा के पहले दिन भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने राष्ट्रपति तो लाम से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच बहुआयामी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

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बुधवार को राष्ट्रपति तो लाम का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका अभिनंदन किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि एक विशेष मित्र का हार्दिक स्वागत है।

औपचारिक स्वागत के बाद राष्ट्रपति तो लाम ने हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। चर्चाओं का केंद्र रक्षा और सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, विकास साझेदारी, समुद्री सहयोग, महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा (जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है), संस्कृति तथा जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्र रहे। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया। प्रमुख परिणामों में वियतनाम का ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ में शामिल होना, वियतनाम के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘माई सन मंदिर परिसर’ में एक ‘साइट इंटरप्रिटेशन सेंटर’ स्थापित करने में भारत का सहयोग, तथा भारतीय अंगूर और वियतनामी ड्यूरियन फलों के लिए बाजार पहुंच प्रदान करना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, दोनों नेताओं की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में 13 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। इनमें दुर्लभ खनिज, संस्कृति, सीमा-पार डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, पर्यटन, शिक्षा, अकादमिक आदान-प्रदान, सिस्टर-सिटी सहयोग, ऑडिट और डिजिटल साझेदारी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

राष्ट्रपति तो लाम की यह यात्रा रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है। ठोस परिणामों के साथ यह यात्रा न केवल आपसी विश्वास को और मजबूत करती है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत वैश्विक स्तर पर दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

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