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ISRO की स्वदेशी परमाणु घड़ी से NavIC को मिलेगी नई ताकत, सैटेलाइट नेविगेशन में भारत बनेगा आत्मनिर्भर

ISRO की बड़ी उड़ान
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक तकनीक को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह तकनीक भारत की क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NavIC को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। परमाणु घड़ी की मदद से उपग्रहों में समय का बेहद सटीक निर्धारण किया जाता है, जो किसी भी नेविगेशन सिस्टम के सही संचालन के लिए बेहद जरूरी है।

क्या होती है एटॉमिक घड़ी?

एटॉमिक घड़ी दुनिया की सबसे सटीक समय मापने वाली तकनीकों में से एक है। सामान्य घड़ियां जहां क्वार्ट्ज क्रिस्टल, पेंडुलम या अन्य यांत्रिक प्रक्रियाओं के आधार पर समय बताती हैं, वहीं परमाणु घड़ियां परमाणुओं की प्राकृतिक आवृत्ति का इस्तेमाल करती हैं। इनमें रुबिडियम और सीजियम जैसे परमाणुओं के ऊर्जा स्तरों से जुड़े बदलावों के आधार पर समय मापा जाता है।

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इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च सटीकता है। यही वजह है कि सैटेलाइट नेविगेशन, वैज्ञानिक अनुसंधान और दूरसंचार जैसी आधुनिक प्रणालियों में परमाणु घड़ियों का विशेष महत्व है।

नेविगेशन सिस्टम में समय की अहम भूमिका

गूगल मैप्स और भारत के NavIC जैसे नेविगेशन सिस्टम उपग्रहों से मिलने वाले रेडियो सिग्नल पर काम करते हैं। जब कोई मोबाइल या नेविगेशन डिवाइस अपनी लोकेशन पता करता है, तो वह अलग-अलग उपग्रहों से प्राप्त सिग्नल के पहुंचने में लगे समय का हिसाब लगाता है। इसी गणना के आधार पर डिवाइस अपनी स्थिति निर्धारित करता है।

रेडियो सिग्नल प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। ऐसे में समय की बेहद छोटी गलती भी लोकेशन की गणना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए उपग्रहों में अत्यधिक सटीक घड़ियों का होना जरूरी है। परमाणु घड़ियां इसी जरूरत को पूरा करती हैं और नेविगेशन सिस्टम को विश्वसनीय बनाने में मदद करती हैं।

NavIC को मिलेगी स्वदेशी तकनीक की मजबूती

भारत की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली NavIC यानी Navigation with Indian Constellation देश और उसके आसपास के क्षेत्रों में नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है। इस प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए उपग्रहों में सटीक समय बनाए रखना बेहद जरूरी है।

अब स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक तकनीक के विकास से भारत इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत कर रहा है। अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) द्वारा विकसित यह तकनीक विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में NavIC के लिए जरूरी उपकरणों का घरेलू स्तर पर विकास और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र में भी उपयोगी

NavIC का इस्तेमाल केवल आम लोगों को रास्ता दिखाने तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग परिवहन, समुद्री गतिविधियों, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक जरूरतों में भी किया जा सकता है। विशेष रूप से सीमावर्ती और समुद्री क्षेत्रों में सटीक लोकेशन की जानकारी काफी महत्वपूर्ण होती है।

NavIC भारत की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए विकसित किया गया है। ऐसे में स्वदेशी परमाणु घड़ी तकनीक इसकी विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।

‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल को भी मिलेगा बढ़ावा

स्वदेशी परमाणु घड़ी तकनीक का महत्व केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। यह भारत की डिजिटल आत्मनिर्भरता और ‘वन नेशन, वन टाइम’ जैसी पहल के उद्देश्यों को भी मजबूती दे सकती है। बैंकिंग, मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल संचार और कंप्यूटर सिस्टम जैसी सेवाओं में सटीक एवं एकसमान समय का विशेष महत्व होता है।

कुल मिलाकर, परमाणु घड़ी तकनीक का स्वदेशी विकास भारत को अंतरिक्ष विज्ञान, नेविगेशन और डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने और देश की अपनी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी।

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