
लखनऊ/रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को शनिवार को रामपुर जेल से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हिरासत में ले लिया। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान करीब 11 महीने बाद जेल से बाहर आए थे। हालांकि, जेल के बाहर पहले से मौजूद ED की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।
आजम खान की गिरफ्तारी पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की रैली में शामिल होने जा रहे अखिलेश ने कहा कि बीजेपी से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। आजम खान के उस बयान पर भी उन्होंने सहमति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें मुसलमान होने की सजा मिल रही है। अखिलेश ने कहा, ”हां, यह सच है जो उन्होंने कहा है। आप बीजेपी से न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते।”
अखिलेश ने एक्स पर लिखा- वक्त बदलता है तो तख्त बदल जाता है
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी आजम खान के समर्थन में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों के जरिए साजिश की जा रही है, जिसे पूरा देश ही नहीं, पूरी दुनिया देख रही है। अखिलेश ने लिखा कि किसी उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना बेहद कायराना हरकत है।
उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, वक्त बदलने पर वही उसकी शिकार हो सकती है। नाइंसाफी जब हद से गुजर जाती है तो जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद निंदनीय बताया।
अब्दुल्ला आजम ने भी जाहिर की पीड़ा
उधर, आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी अपने खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके पास जन्म से जुड़े वीडियो सबूत, अस्पताल के रिकॉर्ड और उनकी मां की मैटरनिटी लीव के दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद पिछले सात साल से उन्हें सजा भुगतनी पड़ रही है।
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें अपने जन्म की तारीख में कथित गड़बड़ी को ठीक कराने के मामले में सजा मिली। उन्होंने दावा किया कि पर्याप्त दस्तावेज होने के बावजूद वह अपना सच साबित नहीं कर सके।
उन्होंने कहा, ”यह मेरी बदकिस्मती है कि मैं सिर्फ इसलिए इस सच को साबित नहीं कर सका, क्योंकि मेरा नाम अब्दुल्ला है। अगर मेरा नाम अब्दुल्ला न होता, तो शायद मैं यह सच साबित कर पाता।”
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में ED की कार्रवाई
ED की कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत हुई है। एजेंसी विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और उसके घोषित वित्तीय स्रोतों के बीच अंतर को लेकर जांच कर रही है। ED ने इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़ी संपत्तियों को भी अटैच किया है।
गौरतलब है कि आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में सजा हुई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत दी थी। इसके बाद 31 अक्टूबर को दोनों रामपुर जेल से बाहर आए, लेकिन आजम खान को ED ने एक अलग मामले में हिरासत में ले लिया।
आजम खान की रिहाई के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया सियासी मुद्दा खड़ा कर दिया है।








