
भारत-सिंगापुर के बीच सेमीकंडक्टर और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा
सिंगापुर। भारत और सिंगापुर ने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने के लिए सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की है। सिंगापुर में आयोजित चौथे भारत-सिंगापुर मिनिस्टीरियल राउंडटेबल (ISMR) में दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक, हरित अर्थव्यवस्था, औद्योगिक पार्क, खाद्य सुरक्षा और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में भारत की ओर से वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद शामिल हुए। सिंगापुर की ओर से उप प्रधानमंत्री गण किम योंग, विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन और गृह मंत्री के. शणमुगम ने भाग लिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) की प्रगति की छह प्रमुख क्षेत्रों—विनिर्माण, कनेक्टिविटी, डिजिटलाइजेशन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कौशल विकास और स्थिरता—के तहत समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर विचार किया।
UPI और डिजिटल कनेक्टिविटी में बढ़ी साझेदारी
बैठक में UPI-PayNow कनेक्टिविटी के माध्यम से सीमा-पार लेनदेन में हुई वृद्धि को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। इसके साथ ही सिंगापुर में भारतीय जेनेरिक दवाओं के पंजीकरण के लिए पायलट व्यवस्था, भारत से सिंगापुर को लीची, आम, चेरी और प्लम के निर्यात तथा प्रसंस्कृत पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात से जुड़े विषयों पर भी प्रगति की समीक्षा की गई।
दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और Singapore Food Agency के बीच हुए समझौते को महत्वपूर्ण बताया। इससे कृषि एवं खाद्य उत्पादों के आपसी व्यापार को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
बैठक में चेन्नई में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विकास सहित अन्य सहयोगी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।
समुद्री विरासत और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग
भारत के पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय और सिंगापुर के संस्कृति, समुदाय एवं युवा मंत्रालय के बीच समुद्री विरासत सहयोग को लेकर हुए समझौते का भी उल्लेख किया गया। इसके तहत समुद्री विरासत के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार होगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन और गृह मंत्री के. शणमुगम के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। जयशंकर और बालकृष्णन ने सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी-लो रेजिडेंशियल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स की आधारशिला भी रखी।
भारत और सिंगापुर के बीच सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, हरित अर्थव्यवस्था और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








