
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़े स्तर पर डिपोर्टेशन अभियान तेज करने की तैयारी कर ली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई के दायरे में करीब 18 हजार अनडॉक्युमेंटेड (बिना वैध दस्तावेज वाले) भारतीय नागरिक भी आ सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन एक बार फिर डिपोर्टेशन के लिए सैन्य विमानों के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है, जो उसकी सख्त आव्रजन नीति का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की टीमें लगातार विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को सीमित कानूनी राहत मिलने की बात भी सामने आई है। कई मामलों में लोगों को सीधे डिटेंशन सेंटर भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
नए डिटेंशन सेंटर तैयार
डिपोर्टेशन अभियान को गति देने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने टेक्सास के एल पासो और कैलिफोर्निया में नए वेयरहाउस खरीदकर उन्हें डिटेंशन सेंटर में बदल दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन परियोजनाओं पर करीब 16,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन केंद्रों में लगभग 12 हजार प्रवासियों को रखने की व्यवस्था की गई है।
इमिग्रेशन वकीलों ने जताई चिंता
न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन अटॉर्नी ग्रेग सिस्किंड का कहना है कि पहले बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया का अवसर मिलता था, लेकिन अब कई मामलों में आईसीई की कार्रवाई के बाद लोगों को सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि अमेरिका की संघीय व्यवस्था में राज्यों के अलग-अलग नियम होने के बावजूद आईसीई पूरे देश में अभियान चला रही है।
2025 में 3,567 भारतीय हुए थे डिपोर्ट
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2025 में अमेरिका से 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था, जबकि 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों को वापस भेजा जा चुका है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान के जरिए 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। उस समय कुछ लोगों के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और संसद में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी।
ट्रम्प प्रशासन की नई कार्रवाई से अमेरिका में रह रहे बिना वैध दस्तावेज वाले भारतीयों की चिंता बढ़ गई है। भारतीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह अभियान किस स्तर तक पहुंचता है और प्रभावित लोगों को कानूनी प्रक्रिया का कितना अवसर मिलता है।







